08-Apr-2020 12:37

नियोजित शिक्षकों ने ठाना है कोरोना वायरस और नियोजनवाद को मिटाना है

शिक्षक व स्नातक विधान पार्षदों की निष्क्रियता से हड़ताली शिक्षकों में आक्रोश, चुनाव में सिखाएंगे सबक. वैशाली जिले के हजारों नियोजित शिक्षक कोरोना वायरस से ज्यादा नियोजनवाद रूपी वायरस से संक्रमित

एक तरफ कोरोना वायरस के संक्रमण के बावजूद वैशाली जिले के हजारों नियोजित शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहने को बाध्य हैं, वही दूसरी तरफ उन्हीं शिक्षक व स्नातक मतदाताओं के बल पर चुनाव जीत विधान पार्षद बनने वाले नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं. राज्य सरकार से शिक्षकों के मसले पर मुंह बंद रखे शिक्षक व स्नातक विधान पार्षदों के खिलाफ शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती दिख रही है. शिक्षकों का कहना है अगर शिक्षक हड़ताल के मसले पर शिक्षक एवं स्नातक विधान पार्षदों की निष्क्रियता यूं ही बनी रही तो आने वाले चुनावों में उन्हें शिक्षकों व स्नातक मतदाताओं की तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया का शिकार होने से कोई नही रोक सकता. ये बातें टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के जिलाध्यक्ष श्री प्रेमशंकर सिंह ने कही.

उन्होंने कहा कि सरकार नियोजित शिक्षकों के साथ वादा खिलाफी कर रही है. सरकार के द्वारा चुप्पी साधकर शिक्षक आंदोलन को दबाने के सरकारी षडयंत्र से शिक्षक घबरानेवाले नही हैं. हड़ताल की अनदेखी कर शिक्षकों को अपमानित एवं प्रताड़ित करने में जुटी सरकार के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश बढ़ ही रहा है. कोरोना वायरस जनित संक्रमण से उत्पन्न आपदा के भयावह दौर में शिक्षकों को अलगाव में डालने के सरकारी हथकंडे का शिक्षक समाज धैर्य पूर्वक जवाब देने के लिए तैयार हैं.

दूसरी तरफ TSUNSS गोपगुट संघ के प्रदेश सचिव सह कोषाध्यक्ष प्रभारी संजीत कुमार गुड्डू, जिला उपाध्यक्ष विमलेश कुमार सिंह, जिलामहासचि पकज कुमार, जिलासचिव संजीव कुमार, जिला मीडिया प्रभारी राजेश कुमार पासमान, और जिला कोषाध्यक्ष रणविजय कुमार ने कहा कि शिक्षक व स्नातक मतदाताओं के बल पर चुनाव जीत विधान पार्षद बनने वाले नेताओं की चुप्पी को शिक्षक समाज अच्छी तरह से समझ रहा है. जिले के हड़ताली नियोजित शिक्षक कोरोना वायरस के संक्रमण से उत्पन्न आपदा और सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ अंतिम दम तक लड़ेंगें. सहायक शिक्षक, राज्यकर्मी का दर्जा, पूर्ण वेतनमान समेत पुराने शिक्षकों की भांति समान सेवा-शर्त को लेकर शिक्षक हड़ताल पर डटे रहेंगें.

उन्होंने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में जितनी मृत्यु कोरोना वायरस के संक्रमण से नहीं हुई है उतनी मृत्यु बिहार में बिहार सरकार के शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी दमनकारी नीति के संक्रमण से हुई है. बिहार में अभी तक कुल 15 हड़ताली नियोजित शिक्षकों की मृत्यु सरकार के दमनकारी नीति के संक्रमण से हो चुकी है. कोरोना वायरस के संक्रमण को सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से फैलने से रोका जा सकता है लेकिन बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों और उनके परिवार को बिहार सरकार जनित नियोजनवाद रूपी वायरस के संक्रमण से रोकने का एक मात्र संवैधानिक उपाय हड़ताल है, जिसे सरकार अपने कुटिल प्रयासों से दबाना चाहती है. लेकिन जिले के नियोजित शिक्षकों ने यह ठान लिया है कि कोरोना वायरस जनित वैश्विक महामारी और बिहार सरकार जनित नियोजनवाद रूपी बिहारी महामारी को बिहार से जड़ सहित उखाड़ फेंकेंगे.

08-Apr-2020 12:37

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