राष्ट्र उत्थान हेतु चलो चलें दो कदम अन्नदाता के साथ-चन्द्रमणि ।





आज किसान आन्दोलन को मजबूत करने हेतु क्षेत्र के रेवरादास, हरदिया,संग्रामपुर सकरावल सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीणों से सम्पर्क कर व्यापक अन्दोलन की रणनीति बनाते हुए किसान नेता समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी ने सत्ता व विपक्ष सहित सभी राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए लोगों को दलगत राजनीति से हटकर किसान हित में आगे आने की अपील करते हुए कहा कि किसान आन्दोलन में बसपा व बसपा सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की चुप्पी से साफ संकेत मिलते हैं कि एक बार पुनः भाजपा की मुहबोली बहन भाजपा से राजनीतिक गठबन्धन कर सकती हैं इस बात के संकेत तो लोकसभा चुनाव के बाद से निरन्तर दिख रहे हैं कारण सरकार के जनविरोधी कार्यों का बसपा ने कभी भी उतना मुखर विरोध नहीं किया जितना कि समय समय पर खुद बसपा सुप्रीमो आगे आकर योगी मोदी के कार्यों को अपना समर्थन जता चुकी हैं |



राजनीतिक गठबंधन हो भी क्यों न जब दोनों के राजनीतिक गुण व विचारधारा कहीं न कहीं समान दिखते हैं एक दलित भावना को उकसा कर सत्ता हथियाता है तो एक हिन्दुत्व व राष्ट्रवाद की भावना से सत्ता हथियाने का काम करता है किन्तु सच यह है कि न उन्हें दलितों की चिन्ता न उन्हें देश के कर्णधार किसानों नौजवानों की चिंता किसान नौजवान तो सिर्फ राजनीतिक दलों के राजनीतिक खेल के खिलौने बनकर रह गये हैं जिनकी भावनाओं से खेलकर हर दल सत्ता तो हथियाता है किन्तु सत्ता पाते ही उसके लिए उन खिलौनों का कोई मोल नहीं रह जाता वो तो खिलौनों के खरीददार पूंजीपतियों के हाथ खेलने लगता है |






समय समय पर शास्त्री, चरण, अटल व कल्याण सिंह किसान मसीहा ने कुछ कल्याणकारी नीतियां लागूं की जिनके सहारे किसान अपने जीवन की गाडी आगे बढा रहा है जाने क्यों लोग भूल जाते हैं कि वो शासन सत्ता के कितने भी उच्च शिखर पर क्यों न पहुंच जायें किन्तु यदि पीछे मुडकर देखें तो उनका भी वजूद कहीं न कहीं खेती किसानी से जुडा है हर कोई देश के पालनहार किसानों का ही पुत्र है किन्तु आज हम अपने पालनहार को ही भूलते जा रहे हैं जिसने समय समय पर देश को अनेक संकटों से उबारने का काम किया है कुछ माह पूर्व लाकडाउन की तरफ देखें तो हर कोई अपने घर पुरखों का जागीर सम्हालने नहीं अपितु उसी खेती व उससे उत्पादित अनाज के दम पर मीलों पैदल चलकर अपने वतन अपनें गांव लौट रहा था शासन प्रशासन भी और कुछ नहीं किसानों के खून पसीने से उत्पादित कृषिउत्पाद को एकत्रित कर राहत सामाग्री वितरित कर रहा था किन्तु खेद का विषय है |






जहां सत्तासीन भाजपा अटल सरकार में गठित स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागूं कर किसानों की दशा सुधारने का अटल जी का सपना नहीं पूर्ण करना चाह रही है वहीं विपक्षीदल भी किसान हित से अधिक पार्टी हित साधने व यह दिखाने में लगे हैं कि किसानों के सच्चे हितैषी वही है वरन किसानों के समर्थन में उन्हें अपने दल के झण्डे बैनर की जरूरत न पडती क्या अन्ना आन्दोलन या स्वामी रामदेव के आन्दोलन में राजनीतिक लोग नहीं थे किन्तु वो झण्डा बैनर लेकर नहीं खडे थे सत्ता व विपक्ष के इस लुका छिपी के खेल को अब आम आवाम को दलगत भावना से परे आगे आकर किसान हितों को लेकर एकजुट आन्दोलन कर अन्नदाता का कर्ज अदा करना होगा हम पहले किसान हैं तब व्यापारी अधिकारी नेता व्यापारी व कुछ और हैं बिना किसान कृषि प्रधान देश की उन्नति व खुशहाली सम्भव नहीं है आयें राष्ट्र उत्थान हित हम दो कदम अन्नदाता के साथ चलें श्री पाण्डेय के साथ प्रमुख रूप से प्रभात शुक्ल, चन्द्रप्रकाश तिवारी, राजेश पटेल,विवेक पाण्डेय रहे मौजूद।

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