कौन होगा लोकतांत्रिक पुलिस अधीक्षक और कब आयेगा वह वैशाली में : मनीष कुमार सिंह |





मेरा अनुभव कहता है कि वैशाली एक ऐसा अपराधिक अड्डा बन गया है, एक ऐसा राजनीति का अड्डा बन गया है, जहां पर पुलिस की भूमिका को मजबूत करना चांद पर जाने के समान होगा। लगातार हो रही प्रशासनिक चूक के कारण वैशाली जिले में पिछले 7 साल में हमने ऐसे लोगों की हत्या होते हुए देखा है, जिसके साथ दिन-रात या कभी सप्ताह और महीने-दो महीने पर एक अच्छी मुलाकात हो जाती थी। वह लोग अच्छे थे या बुरे कानून और देश का संविधान तय करता, लेकिन हत्या से आम लोगों में आतंक का माहौल तैयार किया गया। समाज के लोग के साथ उनके अच्छे संबंध हुआ करते थे, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक मैंने ऐसा केस नहीं देखा, जिसका निष्पादन वैशाली पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में हो चुका हूं। जब सुरेश चौधरी वैशाली के पुलिस अधीक्षक के रूप में आए थे, उससे कुछ समय पहले ही मेरा बिहार आगमन हुआ था। उसके बाद अब तक 7 पुलिस अधीक्षक को देख चुका हूं, लेकिन कोई भी इस लायक नहीं नजर आया, जो वाकई में संवैधानिक रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने लायक होता।



हर बार हत्या के बाद या चुनाव के वक्त आने के साथ पुलिस अधीक्षकों की बदली होती रही है। वहीं इन बदलियों में वह कहानी कहीं गुम जाती है कि किसी की हत्या हुई थी। नए पुलिस अधीक्षक आते हैं और नई रणनीति और नई राजनीति का दौर शुरू करते हैं। और पुरानी हुई हत्याओं पर कोई चर्चा तक नहीं करते हैं। वहीं किसी के घर वाले अगर यह सवाल करने चले जाते हैं कि मेरे परिवार के बेटे, मेरे पति की हत्या, मेरे भाई की हत्या हो गई है तो पुलिस अधीक्षक के रूप में बैठे हुए लगभग लोगों ने परिवार को ही धमकाया और गाली-गलौज कर के भगा दिया। अब जब भी पुलिस अधीक्षक के रूप में किसी की बात आती है तो ऐसा लगता है की एक और नए आतंक का रूप वैशाली में देखने को मिलेगा। क्योंकि अब तक के पुलिस अधीक्षक किसी भी केस में और ना ही किसी परिवार को सुरक्षा देने का काम किया। वहीं पुलिस अधीक्षक ना तो उसके परिवार के सदस्यों की हुई हत्याओं के बदले परिवार की जिम्मेदारियों को निभाया। जिससे उस परिवार का भरण-पोषण हो सके, बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के सुनहरे अवसर मिल सकें ।






आज फिर एक नया पुलिस अधीक्षक का आगमन वैशाली में हो गया। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि पिछले 7 सालों में 7 पुलिस अधीक्षक वैशाली में हुए, सब ने अपने कार्यकाल में हत्याओं को प्राथमिकता दी। हत्याओं की कोई जांच नहीं हुई, फिर कुछ समय अपना दिन काट कर पुलिस अधीक्षक जनता के पैसों पर और जनता के ऊपर अत्याचार कर निकल देते हैं। ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आती है जिससे की किसी भी जिले में पदस्थापित जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक जैसे पदों पर बैठे हुए लोगों की कार्यों की समीक्षा हो। वहीं और उनका अगर दायित्व सही नहीं पाया जाता है, अगर वह अपने कार्यकाल में हुए हत्याओं का या किसी भी प्रकार के जुर्म का निष्पादन कर नहीं जाते हैं तो उन्हें बदली की जगह पर उसी जिले के जेल में कम से कम 1 साल की सश्रम सजा हो ।






वैशाली एक लोकतांत्रिक भूमि है। पूरी दुनिया जानती है कि लोकतंत्र की जननी वैशाली हैं। वैशाली के लोकतांत्रिक लोगों को मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सकें। यह कौन सी संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों को की वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा किए बगैर आसानी से जिला से बाहर निकल जाते हैं। एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत है कि पुलिस अधीक्षक जिम्मेवार हो और आम लोगों के साथ सेवक की भांति खड़ा रहे ना कि मालिक बनकर। अपराधियों को संरक्षण देने की जगह आम आदमी को अपने विश्वास में लें, ताकि पुलिस व्यवस्था लोकतांत्रिक लगे, ना कि अंग्रेजों की हुकूमत महसूस करायें ।