लक्ष्मी के उल्लू ने किया कमाल । छत-दीवाल बिना भवन बहाल ।।





विक्रमजोत, बस्ती। नित नए कार्यप्रणाली के लिए विख्यात सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय अब बिना छत व बिना दीवाल वाले आंगनबाड़ी सेंटर्स के लिए चर्चा में छाई हुई हैं। जानकारी के अनुसार जनपद बस्ती के विक्रमजोत ब्लॉक की सीडीपीओ ने लिखित रूप से बताया है कि उनके कार्य क्षेत्र के अधिकांश आंगनबाड़ी सेंटर्स बिना छत व बिना दीवाल के हैं। क्या है पूरा मामला बता दें कि हाई कोर्ट इलाहाबाद के अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने आरटीआई ऐक्ट,2005 के तहत बस्ती के विक्रमजोत ब्लॉक के सभी आंगनबाडी कार्यकत्री व उनके सेंटर्स के सम्बंध में सूचना मांगी है जिसके जवाब में पत्रांक 41, 42 व 43 जारी करके सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय ने वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि उनके कार्य क्षेत्र के 25 आंगनबाड़ी सेंटर्स में छत नही है जबकि 04 के छत छतिग्रस्त है व 09 के छत ठीक हैं।



विशेष बात यह है कि इनमें से 18 में तो दीवाल तक नही है। इसी प्रकार अधिकांश सेंटर के भवन में शौचालय, दरवाजे व खिड़की भी नही है। क्या है रहस्य छत-दीवाल-दरवाजे-फर्श- शौचालय विहीन आंगनबाड़ी सेंटर्स के बावत रिपोर्टर द्वारा पूछे जाने पर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी कुछ भी बोलने से कतराते रहे हालांकि कुछ ने गोपनीयता के आधार पर बताया कि ऊंचे रसूख व पहुंच वाली दबंग सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय के संदर्भ में टिप्पणी करने की हिम्मत ब्लॉक, जिला व निदेशालय स्तर पर किसी में नही है। फिलहाल इस रहस्यमयी रिपोर्ट का रहस्य सामने आना बाकी है। असलियत से गुमराह करने की साजिश बता दें कि बस्ती के विक्रमजोत ब्लॉक के दबंग सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय का मामला उस समय सुर्खियों में आया जबकि उन्ही के कार्य क्षेत्र अंतर्गत रामनगर आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुमनलता पाण्डेय के प्रकरण में गम्भीर खुलासा हुआ।






तमाम शिकायतों में लगाये गए आरोपों के आधार पर उक्त सुमनलता पाण्डेय अपनी दूसरी शादी गोंडा जनपद में कर लेने, अपने ग्राम प्रधान माता-पिता के पद लाभ, विभिन्न अदालतों में चल रहे दीवानी व फौजदारी मुकदमों व अपात्रता आदि तमाम तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई नौकरी ही गलत तरीके से मात्र कागज पर कर रही हैं जबकि वह बस्ती में रहती तक नही। वास्तविकता के अनुसार सुमनलता पाण्डेय तीसरे जनपद अयोध्या में रहकर अपने दो बेटों को अयोध्या एकेडमी में पढ़ा रही हैं जबकि उनके दूसरे पति रवीश दूबे गोंडा में रहते हैं। इन सबके बीच खुलासा हुआ है कि सुमनलता पाण्डेय को अपने दूर के रिश्तेदार सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय का संरक्षण प्राप्त है। इन्ही कारणों से वास्तविक बिंदु से ध्यान भटकाने व प्रकरण को लटकाने व अटकाने के लिए सीडीपीओ गलत रिपोर्ट प्रस्तुत कर रही हैं।






बीमारी, आरटीआई के बाद भूतकालीन रहस्यमयी अवकाश बेहद चौंकाने वाले प्रकरण में 13 से 15 अक्टूबर 2020 तक यही सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय बिना अनुमति व बिना किस को चार्ज दिए मुख्यालय छोडकड लखनऊ में इलाज हेतु गई थीं व आर के पाण्डेय एडवोकेट दवाई आरटीआई लगाने की जानकारी होने के बाद 29 अक्टूबर 2020 को डीपीओ को प्रार्थना पत्र देकर भूतकाल में अवकाश स्वीकृत कराया। फिलहाल इस सीडीपीओ के आगे नतमस्तक इसके विभाग व अधिकारी कुछ भी कर सकते हैं। आपरेशन कायाकल्प उधर डीपीओ कार्यालय ने बात करने पर जानकारी दी है कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 31 दिसम्बर 2020 के पूर्व सभी अपूर्ण भवन पूर्ण कराकर रँगाई-पुताई व चित्रकारी सहित उपलब्ध करा दिए जाएंगे। यक्ष प्रश्न इन सबके बीच यदि सीडीपीओ की रिपोर्ट को सच मान भी लिया जाए तो यक्ष प्रश्न यह उतपन्न होता है कि बिना छत व बिना दीवाल के कोई आंगनबाड़ी सेंटर बन ही कैसे सकता है ?

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