13-Jun-2018 04:33

संगीत के साथ ही शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में सशक्त पहचान बना चुकी है रश्मि तिवारी

    आज बादलों ने फिर साज़िश की     जहाँ मेरा घर था वहीं बारिश की     अगर फलक को जिद है ,बिजलियाँ गिराने की     तो हमें भी ज़िद है ,वहि पर आशियाँ बनाने की

जानी मानी पार्श्वगायिका रश्मि तिवारी ने न सिर्फ गायिकी की दुनिया में बल्कि शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है।उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदम्य साहस का इतिहास बयां करता है। रश्मि तिवारी ने अबतक के अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।            वर्ष 1995 में भागलपुर में जन्मी रश्मि तिवारी के पिता अशोक प्रसाद तिवारी और मां श्रीमती पुष्पा देवी अपनी लाडली बेटी को उच्चअधिकारी के तौर पर आसीन देखना चाहते थे। बचपन के दिनों से ही रश्मि की रूचि गीत-संगीत की ओर थी। रश्मि की नानी उर्मिला मिश्रा गायिका थी। इस वजह से  रश्मि का रूझान भी गीत-संगीत की ओर हो गया। स्वर कोकिला लता मंगेश्कर और आश भोंसले को आदर्श मानने वाली रश्मि स्कूल कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में गाया करती थी जिसके लिये उन्हें काफी सराहना मिलती। रश्मि का ख्वाब स्टार बनने का था और वह चाहती थी कि उनके नाम से उनके माता-पिता को जाना जाये। रश्मि तिवारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भागलपुर से की। इसके बाद रश्मि बेहतर पढ़ाई के लिये राजधानी पटना आ गयी जहां उन्होंने बीकॉम की पढ़ाई पूरी की।         जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना         सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना         कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें         बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।         वर्ष 2014 रश्मि तिवारी के जीवन में अहम मोड़ लेकर आया। रश्मि ने बताया कि मकर संक्रांति का दिन था और इसी दौरान उन्हें रेडियो पर समाचार मिले कि किसी व्यक्ति को ब्लड की जरूरत आन पड़ी है। रश्मि तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची और उस शख्स को अपना ब्ल्ड दिया। इसी दौरान रश्मि की मुलाकात मां वैष्णव सेवा समिति के सक्रिय कार्यकर्ता मुकेश हिजारिया से हुयी। इसके बाद रश्मि इस संस्था के साथ जुड़ गयी और जरूरतमंद लोगों को ब्लड देने का काम शुरू किया। रश्मि अबतक  16 लोगों को ब्लड दे चुकी है। रश्मि ने बताया कि इसके लिये उन्हें डोनर कार्ड दिया गया लेकिन उसे भी उन्होंने जरूरतमंद लोगो को दे दिया।          खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,         जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,         लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,         जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है…   रश्मि तिवारी को सामाजिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये वर्ष 2014 में यंग डोनर अवार्ड , वर्ष 2018 में यंग अचीवर्स अवार्ड और मंदार रत्न पुरस्कार समेत कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।रश्मि संगीत के क्षेत्र में अपना नाम करना चाहती थी। इस को देखते हुये रश्मि बिहार में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करने लगी जिसके लिये उन्हें लोगों की काफी सराहना मिली। रश्मि को  इसके लिये पाटलिपुत्रा महोत्सव ,बसंत महोत्सव और काइटस फेस्टिबल में सम्मानित किया गया।

        जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो         मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो         ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है         उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो         रश्मि तिवारी रेडियो मिर्ची की ओर से आयोजित मिर्ची यूथ फेस्टिबल में बतौर गायिका के तौर पर सीजन 04 और सीजन 06 में हिस्सा लिया और वह फिनाले राउंड तक गयी। रश्मि भले ही विजेता नही बन सकी लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी है। रश्मि का मानना है कि जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना ,सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें ,बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।रश्मि शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करना चाहती थी। इसी को देखते हुये उन्होंने सीआरसी की ओर से संचालित डीएड पाठय्कम में दाखिला लिया। रश्मि ने बताया कि इस पाठय्कम के पूरे होने के बाद वह  ब्लांइंड लोगों को शिक्षा दे सकती है। रश्मि का कहना है कि समाज के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है इसलिए जरूरी है कि समाज के सभी लोग शिक्षित हो। शिक्षा ही विकास का आधार है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की महत्ता सर्वविदित है. स्पष्ट है कि सामाजिक सरोकार से ही समाज की दशा व दिशा बदल सकती है।

          वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ       हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है रश्मि तिवारी को अभिनय में भी गहरी रूचि रही है। रश्मि ने यूटयूटूब चैनल राओ वीर के लिये ऐसी बीबी अपनी नही और देखी होगी के तीन वीडियो अलबम में काम किया जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया। रश्मि अब इसी चैनल के लिये चौथे अलबम में काम कर रही है।        

रश्मि तिवारी आज संगीत के साथ ही शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना चुकी है। रश्मि के  सपने  यूं ही पूरे नही हुये , यह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। रश्मि ने बताया कि वह अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के साथ ही अपनी नानी को भी देती हैं जिन्होंने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया है। रश्मि अपनी सफलता का मूल मंत्र इन पंक्तियो में समेटे हुये हैं।                 रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा,                 प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा;                 थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर,           मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा।

13-Jun-2018 04:33

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