30-Jun-2019 08:51

भारतीय परिधानों में सजी सांसद नुसरत पर फतवा

साड़ी, सिंदूर और मंगलसूत्र पहनकर संसद में शपथ लेने वाली तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां के खिलाफ फतवा

साड़ी, सिंदूर और मंगलसूत्र पहनकर संसद में शपथ लेने वाली तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां के खिलाफ फतवा जारी किया गया है. देवबंद के धर्मगुरुओं ने यह फतवा जारी किया है. उनका कहना है कि मुस्लिम लड़कियों को सिर्फ मुस्लिम लड़कों से ही निकाह करना चाहिए। मैं डॉ एम रहमान मेरी पत्नी अमिता कुमारी मेरी बेटी अद्म्या अदिति और मेरा बेटा का नाम अभिज्ञान अर्जित।मेरा परिवार ऐसा परिवार जहाँ न जाती की बात होती है न धर्म की ,जहाँ सिर्फ प्यार है।मैं वर्षो से इस अद्भुत जीवन जहाँ सिर्फ प्यार ही प्यार है के जीने के नाते ये कह रहा हु की रिश्ते में न कोई जात पात होती है न ही कोई धर्म,जिस प्यार में जात पात ,धर्म का भेदभाव हो ,फिर वह प्यार ही कहा रह गया।किसी भी रिश्ते के बीच जात-पात,धार्मिक भेदभाव किसी भी दृष्टिकोण से उचित नही है,सम्बंध बनाने के क्रम में जाति-सम्प्रदाय कभी बाधा नही बनना चाहिए बशर्ते उससे किसी व्यक्ति विशेष को कोई क्षति न पहुचे। मैं डॉ एम रहमान एक इतिहास एवं सविधान के जानकार तथा एक अनुभवी होने के नाते मैं ये स्पष्ट रूप से कह सकता हु की नुसरत जहाँ के निजी जीवन पर आपत्ति जताना,उनका विरोध करना,उनपर फतवा जारी करना सविधानिक रूप से गलत है।भारतीय सविधान के मौलिक अधिकार में आर्टिकल 25-28 के अंतर्गत "धर्म की स्वंतत्रता का अधिकार है" इसलिए किसी भी दृष्टिकोण से किसी के निजी जीवन मे दखल देने का कोई तुक नही है।सबको अपने जीवन के अपने अनुसार जीने का हक है बशते उससे किसी का हनन न होता हो,तो मुझे नही लगता कि एक हिन्दू-मुस्लिम के आपसी शादी में किसी ऒर का कोई हनन होता होंगा।

जब हमारे जीवन अपने अनुसार जीने की आजादी भारत का सविधान देता है,धर्म की आजादी देता है फिर किसी के निजी जीवन पर उंगली उठाने वाले मौला मौलबी कौन होते है??और ठीक वैसे ही हिन्दू धर्म मे बहुत से धर्म के ठीकेदार बैठे है जो अपने संगठन के जरिये लोगो के व्यक्गित जीवन पर दखल देते है तो मैं पूछना चाहता हु की उनलोगों ये किसने अधिकार दिया , की आप सबको अपने उंगली पर धुमाओ।

ये मौलवी मौलाना , बाबा या कोई संगठन को किसने हक दे दिया? क्या हम अपनी जीवन उनसे पूछ कर जीये?मुझे ये करना चाहिए क्या नही है उनसे इजाजत लेकर करे??फिर तो ये हमारे मौलिक अधिकार का हनन है।

हमे सबको अपने जीवन खुद से जीने का अधिकार है इसलिए कोई कौन होता है हमपे या किसी पर भी उँगली उठाने वाला । जय हिंद

30-Jun-2019 08:51

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