12-Nov-2017 03:30

"लोकतंत्र महाकुंभ" पत्रिका का लोकार्पण

वैशाली से शुरूआत हुई लोकतंत्र समीझा की पहली पत्रिका। इस लोकतंत्र महाकुंभ पत्रिका का महत्व वैशाली के लोकतंत्र को सुदृढ़ पहचान समीक्षा के साथ करने की है।

भारत के ऐतिहासिक भूमि और लोकतंत्र की जननी वैशाली मैं आज एक ऐतिहासिक पत्रिका का लोकार्पण किया गया। इस पत्रिका के माध्यम से भारत के लोकतंत्र के लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए पुनः निर्माण के लिए उसकी समीक्षा के लिए वैशाली लोकतंत्र के नाम से लोकतंत्र की परिकल्पना को सार्थक बनाने के लिए प्रकाशन किया जा रहा है। आज लोकार्पण में इस पत्रिका का नाम सामने आया इस पत्रिका का नामाकरण लोकतंत्र महाकुंभ के नाम से किया गया है । लोकतंत्र वैशाली की ही देन है और इस वैशाली की ऐतिहासिकता को बनाए रखने के लिए वैशाली लोकतंत्र की समीक्षात्मक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया गया । आने वाले समय में इस पत्रिका की भूमिका समाज हितों में समाज निर्माण में एवं शिक्षा के अनगिनत पहलुओं के साथ सामने आएगा आने वाले समय में लोकतंत्र महाकुंभ पत्रिका अपना एक अलग पहचान बनाएगा। लोकतंत्र महाकुंभ पत्रिका निकालने का मुख्य उद्देश्य बताते हुए मनीष कुमार सिंह संपादक कहा कि क्योंकि यह भूमि लोकतांत्रिक है और लोकतंत्र की समीक्षा आज तक उस स्तर पर नहीं की गई जिससे स्तर पर वैशाली ने लोकतंत्र को स्थापित किया बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। कि भारत के ऐतिहासिक एवं विश्व पटल को एक सूत्र में बांधने का काम जिस लोकतंत्र ने किया उस लोकतंत्र का गला यहां के सांसद विधायक द्वारा घोटा जाता है । बहुत ही दुखद है कि लोकतंत्र की धरती वैशाली को एक सुदृढ़ समाज बनाने में हमारे जनप्रतिनिधि शत् प्रतिशत विफल है और इसीलिए बहुत जरूरी है। भारत लोकतांत्रिक राष्ट्र के नाते नाते देश के हित में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें । आने वाले समय में भारत को एक नए राष्ट्र के रूप में विश्व स्तर पर खड़ा करें इसके लिए मजबूती महत्वपूर्ण है और वैशाली से इस की मजबूती के लिए कार्य करना अपने आप में गौरव का विषय होगा । लोकतंत्र की प्रतिष्ठा वैशाली की प्रतिष्ठा है और वैशाली अपने गणतंत्र की समीक्षा करें और विश्व को एक सूत्र में बांधने का काम करेगी । विश्व इतिहास जानती है कि लोकतंत्र के लिए वैशाली ने क्या नहीं किया लोकतंत्र की संरचना से मजबूत होकर आज पूरा विश्व एक संघीय ढांचे के साथ काम कर रहा है और उसकी मजबूती के लिए हमें आगे आना होगा । इस कार्यक्रम में बहुत सारे विद्वतजनों का आगमन हुआ या कार्यक्रम वैशाली जिले के वैशाली प्रखंड के मंसूरपुर पंचायत में मंसूरपुर चौक पर हुआ । मंसूरपुर अपने आप में एक नाम है और नाम का कारण है वहां का एक छोटा सा अदना सा लड़का राघव महतो। जिसने कम्युनिटी रेडियो के क्षेत्र में अद्वितीय काम किया भारत में जिस राघव के नाम से संविधान के अंदर एक्ट बनाई गई । जिस राघव के नाम से एनसीईआरटी की बुक समान होती है । उस राघव के लिए ना तो संविधान में कोई जगह ही नहीं इन राजनेताओं के मन में कोई लालसा रहे ना । उल्लाह से उनके बीच नहीं किसी भी प्रकार से उसके प्रतिष्ठा की रक्षा में किसी भी प्रकार के राजनीतिक दलों ने अपनी समानता दिखाएं । उसी के छोटे से कार्यालय में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वहां के पूर्व मुखिया सहित पूर्व शिक्षक शिक्षाविद् एवं दर्जनों ग्रामवासी बुजुर्ग बच्चे नौजवान शामिल हुए।

12-Nov-2017 03:30

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