23-Oct-2019 10:47

एक 'अपढ़'दलित सोशलिस्ट नेता के जज्बात - अर्जुन भारतीय

उन्होंने उनके एक नारा :"राष्ट्रपति का बेटा हो या हो भंगी की संतान ,सब की शिक्षा एक समान"

चरित्र एवं ईमानदारी के प्रतीक 50 के दशक से समाजवादी आंदोलन से जुड़े दलित नेता श्री तुलसीराम मेरे बंधु बरवागांव स्थित आवासपर आज अहले सुबह मुझसे मिलने आए और वर्तमान सियासी माहौल पर देर तक गुफ्तगू' की। यूं तो,वे अक्सर मुझसे मिलने मेरे घर आया करते हैं और मैं भी उनके घर जाया करता हूं। मेरा उनसे राजनीतिक रिश्ता ही नहीं ,बल्कि जज्बाती रिश्ता भी मजबूत है। लेकिन आज की बातचीत मेंउनके अंदर आज के सियासी दौर के प्रति उदासीनता के भाव दृष्टिगोचर हो रहे थे।

डॉ राम मनोहर लोहिया के जमाने की चर्चा करते हुए उन्होंने जब यह कहा कि डॉक्टर लोहिया सचमुच में गरीबों के मसीहा थे। मरने के दिन तक वे गरीबों की बेहतरी के लिए ही चिंतित थे।

उन्होंने उनके एक नारा :"राष्ट्रपति का बेटा हो या हो भंगी की संतान ,सब की शिक्षा एक समान" का उल्लेख करते हुए, जब कहा कि उस जमाने के सभी सपने टूट गए, अधूरे रह गए। क्या बात कह रहे थे तुलसीराम!उस दौर के एक 95 वर्षीय गरीब एवं अपढ़सोशलिस्ट नेता ?

आज भी कितनी गहरी सोच है और समर्पित निष्ठा है सियासी सोच के प्रति ? यह वर्तमान सियासी दौऱ के लिए सबक सीखने लायक है तथाईमानदारीएवं सादगीसे सियासी सफर जारी रखनेके लिए प्रेरणादाई भी। दलित सोशलिस्ट नेता के जज्बे को सलाम।

23-Oct-2019 10:47

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