01-Sep-2019 08:14

एक अजीम पत्रकार,जो महामानव और इंसानियत की है प्रयोगशाला l

बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले मुकेश कुमार सिंह,जिन्हें लोग प्यार से दादा ठाकुर कहते हैं और उन्हें लोग देश स्तर पर आधुनिक काल का महामानव मानते हैं ।दादा ठाकुर 34 वर्षों से पत्रकारिता में हैं ।दादा ने वर्ष 1986 में बिहार के पटना से पत्रकारिता का आगाज किय

दादा का रुझान हिंदी पत्रकारिता की ओर हुआ ।लखनऊ में रहकर वर्षों जनसत्ता में अपनी सेवा दी ।कई पत्रिकाओं के संपादक भी रहे ।दादा ने दिल्ली,मुंबई,उड़ीसा, मध्यप्रदेश,पंजाब सहित कई प्रांतों में अपनी सेवा दी है ।दिल्ली प्रेस पत्र भवन से भी वर्षों जुड़े रहे ।दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार बिहारी खबर को इन्होंने नई ऊंचाई दी ।इसी दौरान,दादा का अचानक रुख बदला और वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओर मुड़े और 2002 में जी न्यूज से जुड़े लेकिन कलम से आग उगलने की पिपासा पूरी तरह से जिंदा थी ।दादा 2006 में सन्मार्ग अखबार में बतौर स्टेट हेड अपनी सेवा देनी शुरू कर दी ।लेकिन उसके बाद 2008 में महुआ टीवी,फिर महुआ न्यूज से जुड़े l

2013 तक महुआ न्यूज में रहे और 2013 में ही जी न्यूज के रिजिनल चैनल जी बिहार-झारखण्ड के ब्यूरो हेड बने ।2017 में जी न्यूज से रिजाइन कर इंडिया न्यूज से जुड़े ।इस दौरान कई उतार-चढ़ाव हुए और दादा का कई चैनल में आना-जाना लगा रहा ।दादा अभी जनतंत्र टीवी में बिहार-झारखण्ड ब्यूरो हेड हैं ।पत्रकारिता के लंबे सफर में बेहतरीन पत्रकारिता के लिए दादा को डेढ़ दर्जन से ज्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं ।

1990 में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके पलायन,केदारनाथ त्रासदी,नेपाल में हुए लैंडस्लाइड और भूकम्प,सालाना कोसी बाढ़ त्रासदी,कुसहा बाढ़ त्रासदी और पुर्णिया में आये तूफान में,उनकी रिपोर्टिंग को पीढियां याद रखेंगी ।दादा देश के जाने-माने पत्रकार संघ "अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति" के राष्टीय उपाध्यक्ष हैं ।आपको यह बताते हुए काफी हर्ष हो रहा है कि दादा जब छठी कक्षा के छात्र थे,तभी से उनकी कविता और कहानी,बालक,नंदन, पराग,चंपक सहित कई अखबारों में छपते थे l

दादा ठाकुर पत्रकारिता के साथ-साथ समाजसेवा के क्षेत्र में विख्यात रहे हैं ।देश के सबसे बड़े सामाजिक संगठन श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के दादा राष्ट्रीय संयोजक सह बिहार-झारखण्ड और दिल्ली के मुख्य संगठन प्रभारी हैं ।बेहद अजीम और खास बात यह है कि दादा ने अपने इस जीवन काल में अभीतक अपने गृह जिला बिहार के सहरसा के साथ-साथ देश के विभिन्य प्रांतों में 3 हजार यूनिट से ज्यादा ब्लड डोनेट करवाये हैं ।हजारों मरीज के ईलाज में मदद की है ।ढ़ाई सौ से ज्यादा मरीजों का अपने खर्चे पर इलाज करवाये हैं ।4 सौ से ज्यादा लावारिश शवों का उनके धर्म के अनुसार दाह-संस्कार और दफन करवाये हैं ।कई गरीब बच्चियों के विवाह करवाने के साथ-साथ गरीब बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करवाई है । कुल मिलाकर दादा ठाकुर एकतरफ जहाँ ईमानदार पत्रकारिता के बड़े झंडादार रहे हैं,वहीं उन्होंने इंसानियत की नई और घाणी ईबारत लिखी है ।देश में दादा ठाकुर की छवि एक समृद्ध महानायक की है ।निश्चित तौर पर दादा,नई पीढ़ी के लिए अकूत ऊर्जा के स्रोत हैं ।दादा इंसानियत के जीवंत प्रयोगशाला हैं जिनसे सबक लेते हुए बहुत कुछ सीखा जा सकता है ।जाहिर तौर पर,दादा ठाकुर बिहार ही नहीं बल्कि देश का गौरव होने के साथ-साथ अजीम और शलाका पुरुष हैं ।

01-Sep-2019 08:14

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