09-Jun-2019 01:04

5:30 हो गया, अब मैं ड्यूटी पर नहीं हूँ : मानवजीत सिंह ढिल्लों ( वैशाली पुलिस अधीक्षक)

लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र की भूमि पर एक लोकतांत्रिक पुलिस अधीक्षक की जरूरत।

आज देश एक बार फिर एक बच्ची के साथ हुए निर्दयी, हृदयविदारक घटना से आहत हैं, तो रह घटना फिर यह सवाल छोड़ गई कि जिम्मेदार कौन ? वैशाली के मुख्यालय पर मोमबत्ती कार्यक्रम की धुम फिर मची है। लोग फिर एकबार राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे पर दिल खोलकर बाँहे फैलाये खड़ा है। लेकिन यहीं लोग एक सप्ताह बाद कहीं ऐसी घटनाओं पर चर्चा मात्र या बहुत बुरा हुआ था कहकर अपने दिलोंं को संतोष देते ही नज़र आयेंगे। मासूमियत लागातार कूचले जा रहे हैं और हम कैंडल मार्च में व्यस्त हैं। जरूरत यह है कि राजनीति के गलियारों में बैठे उन तमाम लोगों को राष्ट्रद्रोहियों की भाँति सजा दी जाती जिन्होंने संस्कृति, संस्कार और सभ्यता विहीन अशिक्षित राष्ट्र की नींव रख डाली हैं।

मेरा अनुभव जो छह वर्षों में बिहार के साथ खास कर वैशाली के लिए हुआ वह फिर एकबार व्यक्त करता हूँ। जिस समय मैं बिहार आया उससे महज़ दो महीने पहले मुजफ्फरपुर की नवरूणा जो महज 13 साल की थी, उसके साथ बड़ी घटना हुई और उसमें जिनके प्रमुख नाम आये वो सब आज भारत के संवैधानिक व्यवस्था के तहत सर्वोच्च पद पर हैं। पुलिस महकमा हो या राजनीति के उस घटना में शक के दायरें के लोगों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया। हाजीपुर शहर के राजेंद्र चौक पर एक विधवा की दुकान पुलिस के सहयोग से तोड़कर फेका गया और आज वहाँ हाजीपुर का सबसे बड़ा माँल या कहें सबसे बड़ा ठग्ग दुकान गगनचुंबी रुप से शान में खड़ा हैं। बिदुपुर के खजवत्ती में मासूम बच्चियों के साथ हुए बालात्कार, हत्या के मुख्य आरोपी विधायक पर कोई गाज नहीं गिरी, उल्ट राष्ट्र द्रोही की भूमिका में खड़े को राष्ट्रवादी फैक्ट्री बनाने वाली पार्टी ने ही जगह देकर चुनाव मैदान में उतारी। शायद हाजीपुर की जनता को याद होगा कि अच्छे दिन वाली पार्टी के प्रमुख नेताओं ने वसावन सिंह इंडोर स्टेडियम में खुली बहस के दौड़ान कईयों वादें किये जो अगले दिन के पेपर की सुर्खियों तक सीमित रह गया।

आगे बढ़ने पर देखा गया कि वैशाली पुलिस पिछले छह साल में दो बार ही सक्रिय नज़र आई। जब हाजीपुर के ही पूर्व विधायक के पुत्र की हत्या निवर्तमान विधायक के द्वारा कराने का आवेदक पूर्व विधायक द्वारा ही किया गया और प्राथमिकता दर्ज होने के 24 घंटे में ही पत्नी को आरोपी बनाकर विधायक को हत्याकांड से ही गायब कर दिया गया। वहीं आजकल पत्नी भी बाहर हैं तो हत्यारा कौन ? वहीं उसके कुछ समय बाद ही राघोपुर के जुड़ावनपुर में थानाध्यक्ष की हत्या साल के प्रथम दिन ही हो गई तब लगा, वैशाली में पुलिस जिंदा हैं। जिन दो हत्याकांड में कोई विडिओ नहीं था उसकी जाँच 24 घंटे में ही हो गई। जबकि छह साल में लगभग 250 से सिर्फ ज्यादा हत्याकांड हुई, लेकिन आज तक किसी में पुलिस को सफलता प्राप्त नहींं हुई। वैशाली जिले के विभिन्न जगहों पर जैसे सुशील सिंह, मनीष सहनी, संजीव लाला नामचीन हत्यारे को आज तक नहीं ढ़ुंढ़ पाई वैशाली पुलिस। कई हत्याकांड के सीधे विडियों फुटेज होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठा पाई वैशाली पुलिस।

वैशाली पुलिस अधीक्षक सुरेश कुमार चौधरी, राकेश कुमार और अब मानवजीत सिंह ढिल्लों तक लगभग नींद में ही है। इन तीनों के काल में इतनी ज्यादा हत्या हुई हैं कि वैशाली को हमेशा दहशत में ही रखा है। सुरेश कुमार चौधरी और राकेश कुमार बहुत ही सफाईपोशी से वैशाली छोड़ चले, लेकिन आज तक इनके काम की समीक्षा करने वाले अधिकारियों ने उनपर कोई कार्यवाई तक नहीं की। जबकि सुरेश कुमार चौधरी को तो पदोन्नति भी प्राप्त हो गई, जो लोकतंत्र के लिए घातक हैं। वहीं ताबर तोड़ रूप में मानवजीत सिंह ढिल्लों को यहाँ लाया गया, इनकी पत्नी के कामों की चर्चा देखकर लोगों को विश्वास हुआ, सरदार जी संवैधानिक रूप से वैशाली की गरिमा को मजबूत करेंगे। लेकिन निराशा के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हुआ। मानवजीत सिंह ढिल्लों जो सुबह 10:00 से 5:30 तक ही ड्यूटी पर रहते हैं, ऐसे पदाधिकारी को 24 घंटे के लिए किसी जिले की बागडोर देना कितना घातक हो गया है यह पिछले 15 दिनों से चल रही हत्याकांड से स्पष्ट है। वहीं लूटकांड इतनी बड़ी संख्या में बढ़ गई हैं कि आम आवाम़ स्वतंत्र रूप से कहीं आने जाने में भी असक्षमता महसूस करते हुए जीवन जी रहा है। वैशाली की लोकतांत्रिक व्यवस्था से राष्ट्र को शिक्षा मिलना चाहिए था वह आज बेबश और लाचार खड़ी हैं। ऐसा कोई तो हो जो कहें आप सुरक्षित हाथों में है और आप जीवन की रफ्तार तेज कर राष्ट्रवाद को और मजबूत बनाने की तरफ बढ़ते रहें।

09-Jun-2019 01:04

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