08-Jun-2018 11:37

42 साल से आरक्षण प्राप्त कर अपना घर भरते रहे रामविलास पासवान अब आरक्षित वर्ग को समझ आया

पहली बार दलितों को समझ आया कि रामविलास पासवान उनके समाज के नहीं। बक्सर के रहने वाले रामविलास पासवान हाजीपुर को माँ नहीं मानते। माँ जैसी कह कर करते हैं संबोधित। जब रामविलास पासवान अपने गाँव-घर के नहीं हुए तो हाजीपुर से उनका कोई रिश्ता ही नहीं। 42 साल स

"मैं उस घर में दिया जलाने चला हूँ, जिस घर में सदियों से अंधेरा हैं" यहीं श्लोगन के बल पर आरक्षित वर्ग के लोगों को 42 सालों से गुमराह करते आ रहे हैं केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान। याद हो कि वर्ष 1977 के आम चुनाव में हाजीपुर लोकसभा सीट को आरक्षित किया गया था। जो लोग उनके सहयोगियों में रहे हैं, जिनके कंधों पर घुमकर, जिनके घरों का पानी पीकर रामविलास पासवान खड़े हुए सबसे पहले उन्हीं को समाप्त कर दिया। लोगों का कहना है कि रामविलास पासवान वर्ष 1977 में लगभग 17 रूपये लेकर हाजीपुर आये थे और उन्हें पलको पर बैठाकर लोंगों ने सराहा। एक युवा एवं गरीब नेतृत्व को अपना सर्वस्व न्योछावर करने के बावजूद हाजीपुर की जनता आज अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। 42 साल के इस सफर में रामविलास पासवान ने कुछ खास लोंगों को नौकरियों के बोझ से तले दवा दिया। वहीं लोग आज तक रामविलास पासवान के प्रचार प्रसार के सशक्त माध्यम है। वो कौन लोग हैं जिन्हें नौकरी प्राप्त हुआ, तो उनके बारें में बताते हैं कि वो ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपना जमीन बेचकर पार्टियों को सिंचा या दलित वर्ग के वह लोग हैं जो 500-5000 वोट को उनके लिए बना सकते हैं। एक केन्द्रीय मंत्री होते हुए नौकरी देने का अधिकार नहीं होता है तो कैसे नौकरियों के बोझ तले लोगों को एहसान तले दवाया गया। यह बहुत ही गंभीर सवाल हैं, लेकिन लोगों को बुरा लगेगा, क्योंकि घर चलता है। रामविलास पासवान आज तक जिस विभाग में रहें, मंत्रालय संभाला , उसमें वैध तरीकों से अवैध रूप से नौकरियों में कुछ लोगों को बहाल किया गया। वहीं दूसरी तरफ ध्यान दें तो जिस बातों के लिए आरक्षण दिया गया उसका एकलौता फायदा बिहार में उठाया तो वह है रामविलास पासवान ने। दूसरे का कह कर आपने घर में चिराग ले आयें और आरक्षित वर्ग के गरीबों को ध्वस्त कर दिया। अपनी पहली पत्नी को छोड़ने से लेकर अपने बच्चों तक के नहीं हुए, तो दलित समाज आज भी रामविलास पासवान से आशा रखे हुए हैं तो यह जातिवाद के फैलाये दलदल का नतीजा है। रामविलास पासवान ने जो चिराग पासवान के जन्म से लेकर आज सांसद बनाने में अपना बहुमूल्य समय और योगदान दिया वह हाजीपुर के लगभग 5 लाख दलितों का था। चिराग पर जो विश्वास रामविलास पासवान ने दिखाया वहीं विश्वास हाजीपुर की जनता ने रामविलास पासवान पर दिखाया। लेकिन विश्वास को चौतरफ़ी कत्लेआम किया गया।

ज्ञात हो कि जिस समय रामविलास पासवान वर्ष 1977 में हाजीपुर से सांसद बने उस समय के मात्र 31 साल के थे। एक युवा सांसद, जिसे देखकर नये हाजीपुर की कल्पना सत्य प्रति हो रही थी। लेकिन हाजीपुर के लाखों घर को यह पता नहीं था कि यह युवक हम युवकों की दुनिया बर्बाद कर देगा। उस समय के 20 - 30 साल के युवा आज उनके ही समक्ष ही खड़े हैं और आज भी दो जून की रोटी के लिए तरस्त हैं। वो आज भी शिक्षा से कोसों दूर हैं और उनके बच्चों का शिक्षा से रिश्ते नहीं बना पा रहे हैं। दलित समाज के लिए आरक्षण का मतलब यह कतई नहीं था कि उन्हें भीख दिया जाए। सवर्ण वर्ग का डर दिखा कर ही राजनीति शुरुआत की थी, जो आज भी वहीं अटकी हुई हैं। लेकिन रामविलास पासवान अपने ही दलित समाज को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा हुआ है जिसका परिणाम हुआकि लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया। आम आदमी के लिए मूलभूत सुविधाओं में : शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, सड़क, पानी, स्वस्थ वातावरण ताकि शुद्ध हवा ले सके, स्वस्थ भोजन की आवश्यकता पूरी करनी चाहिए थी। जिसके बाद ही आम आदमी अपनी और जरूरतों के लिए प्रयास कर पाता। लेकिन रामविलास पासवान अपना ही परिवार बार बार बसाने में व्यस्त रह गए। यहीं कारण है कि रामविलास पासवान किसी का भी व्यक्तित्व निर्माण नहीं कर पायें। रामविलास पासवान, हाजीपुर के नाम पर जो ख्याति अर्जित किया वाकई उस लायक नहीं थें। रामविलास पासवान ने एक ऐसा रेखा खिंचा जो आने वाले समय में युवाओं पर भरोसा करने में आम जन को परेशानी होगी। खास कर उस युवाओं को जिनके पास पुस्तैनी धन ना हो, क्योंकि जिसके पास कुछ नहीं वह वाकई सामाजिक न्याय करने में असक्षम होगा। यह प्रमाणित करने के लिए रामविलास पासवान से बड़ा कोई उदाहरण नहीं होगा।

केंद्रीययमंत्री रामविलास पासवान को उस समय जोड़दार झटका लगा जब उनके ही जाति के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। 42 सालों का गुबार अब फूट रहा है। सत्ता के मद में रामविलास पासवान ने कभी अपने जाति के साथ सामाजिक न्याय नहीं किया। सिर्फ़ जाति का उपभोग अपने चुनावी मैदान में करते रहें। दलितों के मसीहा से लेकर दलितों की आवाज़ और ना जाने कितने प्रकार के हथकंडों का प्रयोग किया, लेकिन दलितों के विकास के नाम पर अपना विकास किया। इसी से छुब्ध होकर हाजीपुर में रामविलास पासवान का विरोध शुरु हो गया। हाजीपुर में पहली बार इस तरह का विरोध का सामना करना पड़ा रामविलास पासवान को और वह भी अपनी ही जाति के लोगों के द्वारा। ज्ञात हो कि हाजीपुर में गुरुवार को बड़े आलिशान होटल में बैठकर योजनाओं का बखान करना सुनिश्चित था। जिसके विरोध में उनकी ही जाति के दलितों ने रामविलास पासवान का विरोध काला झंडा दिखाकर किया। विशेष जानकारी के अनुसार लोजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को गुरुवार को उस समय झटका लगा, जब उन्हें अपने ही लोकसभा क्षेत्र में लोगों ने काला झंडा दिखाया। लोग उनके खिलाफ नारे भी लगा रहे थे। दरअसल इन दिनों रामविलास पासवान बिहार व झारखंड के विभिन्न जिलों में नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिना रहे हैं। केंद्र के चार साल के कामकाज के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र हाजीपुर पहुंचे थे। वहां पर संयुक्‍त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लोगों ने उन्‍हें काला झंडा दिखाया। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने रामविलास पासवान पर उपेक्षा करने का आरोप लगाया संवाददाताओं से मिली जानकारी के अनुसार हाजीपुर-पटना रोड स्थित अनामिका होटल में रामविलास पासवान प्रेस कॉन्फ्रेंस करनेवाले थे। उसी होटल के पास संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रदर्शनकारी भी आये हुए थे। जैसे ही केंद्रीय मंत्री का काफिला वहाँ से गुजरा, संयुक्त संघर्ष मोर्चा से जुड़े लोगों ने उन्हें काला झंडा दिखाया। इसकी जानकारी मिलते ही एएसपी अजय कुमार पुलिस बल लेकर पुलिसिया ढंग में आयें। हालांकि तब ​तक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्य झंडा दिखा वह अपना काम करके जा चुके थे। वहीं कार्यकर्ताओं ने बताया कि चार सालों में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अपने संसदीय क्षेत्र हाजीपुर के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया है। इसके पहले रामविलास पासवान जब भी केंद्र में मंत्री रहे कुछ ना कुछ काम होता रहा हैं। राष्ट्रीय स्तर पर हाजीपुर की पहचान रही, जिसको लेकर इसबार कोई ख़ास उपलब्धि हासिल नहीं किया। ना ही तो एक भी बेरोजगार को रोजगार मिला और ना ही विकास का कोई काम हुआ है। लोगों का यह भी कहना था कि इस बार क्षेत्र की जनता को निराशा हाथ लगी है। जबकि उम्मीद थी इस बार विकास का काम और तेज होगा। लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार के साथ यह सब जुमला ही रह गया। दलितों पर अप्रत्यक्ष रूप से रामविलास पासवान ने धोखा देने का काम किया हैं। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बताया कि उनलोगों की उम्मीद पर पानी फिर गया।

गौरतलब है कि रामविलास पासवान को हाजीपुर में अपने चुनावों को लेकर चिंता सता रही हैं। तीन बातें जो सामने आई इस विरोध का तो पहला यह कि रामविलास पासवान के झूठ से दलित समाज छुब्ध हैं। हाजीपुर में अब दलित समाज के भी कुछ लोग सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हो रहे हैं और कुछ मुखिया एवं अन्य माध्यमों से पैसे जमा कर चुके हैं। उनकी मंसा भी दो-दो हाथ करने की है। जिस ख्वाब से रामविलास पासवान के साथ लाखों युवा राजनैतिक महत्वाकांक्षा से जुड़े वह अधर में हैं और रामविलास पासवान के लगभग खानदान के लोग राजनीति में सेट हो गयें। तो एक नई स्वरूप में हाजीपुर की दलित राजनीति खेलने का विचार चल रहा है। तो विरोध का एक कारण यह सामने आता हैं। दूसरा यह कि अब हाजीपुर के दलितों में यह जागरूकता आ गई कि जब हमारे लिए ही आरक्षित सीट हैं तो ठेके के सांसद की जरूरत अब हाजीपुर को नहीं है। इसलिए हाजीपुर की जनता को भी एक बार प्रयास करना चाहिए कि अब ठेके पर सांसद की जगह अपने घर का ही सांसद हो। तो इसके पीछे कुछ लोगों का दिमाग और समर्थन उनलोगों को मिल रहा है जो रामविलास पासवान के साथ राजनीति का गुर सीखे हैं। जिसे लेकर लोजपा के लोगों ने ही नई रणनीति तैयार कर लिया है और 2019 रामविलास पासवान के लिए चुनौतियों से भरा होगा। जब उनके ही लोगों का नारा होगा, अब मेरा घर छोड़ो। रामविलास पासवान लगातार अपने लोगों के साथ धोखा देते रहे हैं। एक-एक वोट के लिए सरकार गिराने से लेकर सत्ता में बने रहने के लिए गैर सिद्धांतवाद का नंगा प्रदर्शन किया है। हाजीपुर के नाम की इज्जत़ जीतनी बढ़ाई जाने कि जरूरत थी, समय समय पर प्रतिष्ठा का हनन करने में कोई कोताही नहीं बरती हैं। फिर से चुनावी मौसम आने वाले को लेकर बदलाव की संभावनाएँ दिखने लगी हैं। पिछले कुछ समयों में केंद्रीय मंत्री पासवान पटना और झारखंड में अपने संवाद कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। हालांकि झारखंड के रांची में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने यह भी कहा कि अब जमाना युवाओं का हैं और आने वाला समय चिराग और तेजस्वी का है. उन्होंने यह भी कहा था कि लालू प्रसाद हमारे ग्रुप के नेता हैं और उन पर कोई टीका टिप्पणी नहीं करेंगे। तो लालू प्रसाद यादव की बातें यहाँ सत्य होते दिख रही हैं जिसमें कहा था कि रामविलास पासवान मौसम वैज्ञानिक हैं।

08-Jun-2018 11:37

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