12-Nov-2019 05:57

2024 में किसका राज ? लोक स्वराज ! लोक स्वराज !!

भारत की जनता "सत्ता परिवर्तन" एवं "व्यवस्था परिवर्तन" का भेद जानने लगी है तथा व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में कार्यरत समूहों को शक्ति प्रदान करने लगी है, चाहे वह लोक स्वराज मंच हो, अन्ना हजारे हों, अरविन्द केजरीवाल हों, या अनेकानेक स्थानीय आन्दोलन

पिछले कुछ वर्षों की परिस्थितियों से स्पष्ट है कि वर्तमान भारत में "लोक" "तंत्र" पर संप्रभुता स्थापित करने हेतु कटिबद्ध है । लेकिन तंत्र षड्यंत्र रच कर 'लोक" के इस पुनीत कार्य को दबाने का कुचक्र करता रहता है l राजनीति पर समाज के अंकुश की इच्छा अब उत्तरोत्तर बलवती हो रही है । लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि बलवती हो रही स्थिति को तंत्र षड्यंत्र पूर्ण नीति से डाइवर्ट करने का कुत्सित प्रयास करते रहता है l इस "लोक" जनजागरण का श्रेय भारतीय समाज को तो जाता ही है, साथ-साथ समूची राजनैतिक व्यवस्था की बंदरबांट वृत्ति के खुलासों ने भी इस जन-जागरण को पुष्ट ही किया है ।

अब भारत की जनता "सत्ता परिवर्तन" एवं "व्यवस्था परिवर्तन" का भेद जानने लगी है तथा व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में कार्यरत समूहों को शक्ति प्रदान करने लगी है, चाहे वह लोक स्वराज मंच हो, अन्ना हजारे हों, अरविन्द केजरीवाल हों, या अनेकानेक स्थानीय आन्दोलन । परिवर्तन की चाह तथा कार्यान्वयन में अंतर होता है, क्योंकि चाह नीयत-प्रधान होती है एवं कार्यान्वयन नीति-प्रधान । जयप्रकाश आन्दोलन में भी नीयत ठीक रहीं, नीतियाँ गड़बड़ाईं । आज 45 साल बाद फिर ऐसा ही सुनहरा मौक़ा भारत के सामने दिखाई दे रहा है, बशर्ते उस समय की नीतिगत त्रुटियों की पुनरावृत्ति से बचा जाय तो सम्पूर्ण क्रान्ति निश्चित तौर पर संभव है । साथ ही साथ व्यवस्था परिवर्तन संभव है l

लोक स्वराज मंच 1999 से ही व्यवस्था परिवर्तन कार्यान्वयन के नीतिगत मसलों में स्पष्ट रहा है । भावी भारत का संविधान एवं लोक संसद के विचार इसके प्रमाण हैं । बदलते भारत को इन विचारों से प्रत्यक्ष परिचय करवाने हेतु लोक स्वराज मंच ने व्यापक जन-चेतना यात्रा आयोजित की है। आप भी लोक स्वराज मंच के माध्यम से बदलते भारत के नवनिर्माण में सहयोगी बनें, रमेश कुमार चौबे, वाट्स एप नंबर 7004320912 से संपर्क करें, एवं इस यात्रा में अपनी क्षमतानुसार सहयोग दें । वर्ष 2024 में व्यवस्था परिवर्तन को अमलीजामा पहनाने के लिए अभी से ही सबको इस मुहिम से जुड़ना होगा और अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम में जोड़ना होगा l

सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने और संघर्ष करने का समय आ गया है l जातिगत भावनाओं और धार्मिक विभेदकारी नीतियों से ऊपर उठ कर एक भारत सर्वश्रेष्ठ सर्वशक्तिमान भारत बनाने के लिए सबको इस मुहिम में जुड़ना होगा और वैदिक व्यवस्था और वैदिक सिस्टम को प्रतिष्ठापित करना होगा क्योंकि वैदिक कानून में समानता और न्याय का श्रेष्ट सिस्टम हैं जिसका विकल्प आज तक नहीं हो सका है l वैदिक कानून व्यवस्था समाज की एकता अखंडता और मजबूती प्रदान करता है और भारतीय संस्कृति को मजबूत करता है और देश समाज बल्कि ब्रम्हांड को एक दृष्टिकोण से देखता है l मूल रूप में वैदिक न्याय और वैदिक सिस्टम को लागू करके ही सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया के मूल मंत्र को लागू किया जा सकता है l

12-Nov-2019 05:57

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