28-Mar-2020 08:27

02 अप्रेल को अपने घरों में शिक्षक मनायेंगे वेदना दिवस

हड़ताली शिक्षकों के मसले पर सरकार की चुप्पी को याद रखेंगे शिक्षक

कोरोना संकट में शिक्षकों के प्रति उपेक्षापूर्ण सरकारी व्यवहार के खिलाफ प्रदेशभर के शिक्षक परिवार 31 मार्च को रहेंगे उपवास पर ◾ 02 अप्रेल को अपने घरों में शिक्षक मनायेंगे वेदना दिवस - अपने अपने धर्मानुसार करेंगे पुजा हवन नमाज ◾ वेतन भुगतान के मसले पर श्रम मंत्रालय के निदेशों को भी खारिज कर रही सरकार ◾ हड़ताली शिक्षकों के मसले पर सरकार की चुप्पी को याद रखेंगे शिक्षक ◾ उपेक्षा और दमन के खिलाफ शिक्षकों की नाराजगी को हलके में न ले सरकार ◾ हड़ताली शिक्षकों का ईमेल फॉर जस्टिस कैंपेन जारी -31 मार्च तक तक चलेगा ◾ कोरोना संकट और सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ मांगों पर जारी रहेगी शिक्षक हड़ताल

वैशाली / 28 मार्च 2020 / कोरोना संकट के बीच विगत 17 फरवरी से ही हड़ताल पर गये शिक्षकों की सुध लेनेवाला कोई नही है. न तो सरकार हड़ताली शिक्षकों से बात कर रही न ही उनके मसले पर कोई निर्णय ले रही है. उलटे श्रम मंत्रालय के निदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए बिहार सरकार, हड़ताली शिक्षकों के पूर्व के लंबित वेतन के भुगतान पर भी रोक लगाकर उन्हें भूखों मार देने के हालात पैदा कर रही है. सघन शिक्षक हड़ताल से दबाब में आयी सरकार को कोरोना आपदा ने शिक्षकों के प्रति अपने भड़ास निकालने का मौका दे दिया है. शिक्षक दोहरे दबाबों के बीच भी मजबूती से हड़ताल में बने हुए हैं. हालांकि इस बीच हड़ताली शिक्षकों ने सुदूर गांव देहात तक कोरोना जागरुकता अभियान चलाकर अपने सामाजिक पेशागत दायित्व का पालन करने में कोई कसर नही छोड़ी है.

लेकिन सरकार शिक्षकों के मसले पर चुप्पी साधके वेतनबंदी का फरमान जारी करते हुए हड़ताली शिक्षकों के निलंबन बर्खास्तगी और प्राथमिकी का रवैया अख्तियार किये हुए है. हड़ताली शिक्षकों के भी सामने करो या मरो के अलावे कोई विकल्प नही है. हजारों शिक्षक पर निलंबन की तलवार लटकी हुई है, बहुत शिक्षकों की बर्खास्तगी हो चुकी है, ऐसी स्थिति में शिक्षक भी बगैर सरकारी पहल के हड़ताल से वापस लौटने की स्थिति में नही हैं. इस संबंध में टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के जिला अध्यक्ष सह बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अघ्यक्ष मडली सदस्य श्री प्रेमशंकर सिंह ने कहा कि शिक्षकों के मसले पर सरकार की चुप्पी खतरनाक है. किसी लोकतांत्रिक प्रणाली में अपने कर्मचारियों के प्रति सरकार की ये बेरुखी मानवता और संविधान का गला घोंटने जैसा है. खुद को जनान्दोलनों की उपज बतानेवाले मुख्यमंत्रीजी को अहम त्यागकर जनविपत्ति की इस बेला में अपने नागरिकों कर्मचारियों शिक्षकों की जीवनरक्षा करनी चाहिए. यह वक्त सबक सीखाने की मानसिकता से चलने का नही है. बिहार का शिक्षक समाज कोरोना के खिलाफ सरकार और जनता के जंग में एकजुट है. सरकार पहल लेकर शिक्षकों के मसले पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय ले.

कोरोना संकट में शिक्षकों के प्रति उपेक्षापूर्ण सरकारी व्यवहार के खिलाफ प्रदेशभर के शिक्षक परिवार 31 मार्च को अपने घरों में उपवास पर रहेंगे. और इस उपवास की सूचना विधिवत रूप से सरकार को दी जायेगी. इसी क्रम में 02 अप्रेल को अपने घरों में शिक्षक वेदना दिवस मनायेंगे. वेदना दिवस मनाते हुए हड़ताली शिक्षक अपने अपने धर्मानुसार पुजा, हवन, नमाज, अरदास आदि करते हुए सरकार के संवेदनशीलता की कामना करेंगे. गोपगुट के जिलाउपाध्यक्ष विमलेश कुमार सिंह, जिला सचिव संजीव कुमार, जिला महासचिव पंकज कुमार, जिला संयोजक दिनेश कुमार ओझा, जिला कोषाध्यक्ष रणविजय कुमार, औंर कार्यकारिणी सदस्य संजीव कुमार उर्फ मन्ना डे, ने कहा कि न तो सरकार हड़ताली शिक्षकों से बात कर रही न ही उनके मसले पर कोई निर्णय ले रही है. उलटे श्रम मंत्रालय के निदेशों को दरकिनार करते हुए बिहार सरकार, हड़ताली शिक्षकों के पूर्व के बकाये वेतन भुगतान पर भी रोक लगाकर शिक्षकों के समक्ष भूखमरी जैसी स्थिति पैदा कर रही है. बावजूद इसके हड़ताल में बने रहते हुए शिक्षक कोरोना के खिलाफ सरकार के कैंपेन में वालिंटियर करने को तैयार हैं. कोरोना के खिलाफ सरकारी कदमों के साथ रहते हुए भी सहायक शिक्षक- राज्यकर्मी का दर्जा, वेतनमान व सेवाशर्त की मांगों पर शिक्षक मजबूती से अपने हड़ताल में बने रहेंगें.

28-Mar-2020 08:27

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