10-Apr-2018 08:09

बाबा साहब के संविधान में उनके ही जातियों की आस्था नहीं

भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर आघात करने में लगे राजनेता। आम आदमी को नहीं देना चाहते शिक्षित, ताकि उनकी वंशवाद राजनीति पनपती रहे।

पूर्व निर्धारित भारत बंद का आगाज आज पूरे भारत में नजर आ रही हैं । सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भारत के सभी दलों ने पीठ पीछे से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को हवा देकर सड़को पर उतारा। 200 रूपये से लेकर 500 रूपये तक खर्च कर शहरों में भीड़ जुटाई गई। 2 अप्रैल को भारत बंद का पटकथा राजनीति के गलियारों में लिखी गई थी। जिसका प्रत्यक्ष आकर बड़े बड़े नेता संविधान में आस्था व्यक्त करने में लगे थे और दूसरी ओर संपूर्ण भारत में दंगा फैलवाई। सर्वविदित है कि प्रत्येक शहरों में किसी भी दल के अनुसूचित जाति और अनसूचित जन जाति समाज के लोग रहे हो, चाहे वो सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त हो या आज सेवारत हो। सब ने सड़को पर दंगा फैलाने का काम किया और भारत के वर्तमान संविधान में अपनी आस्था नहीं दिखाई। यह वहीं संविधान है जिसके लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का नाम लिया जाता हैं। जिस जाति समाज के लिए बाबा साहब ने एक खास लकीर खींची वहीं जाति आज उनके संविधान में आस्था नहीं रखती हैं। इसी कड़ी को बनाये रखने एवं संविधान की गरिमा यथावत रहे के लिए समाज के दूसरे तबकों द्वारा आज मंगलवार 10 अप्रैल को बंद का आह्वान किया। नारा दिया गया :- "10 अप्रैल को फिर होगा भारत बंद अब होगा महाअंदोलन आरक्षण हटाओ देश बचाओ | सब एक समान | सबका एक अधिकार |" फिर sc st वालों के साथ फिर छुआछूत भी होनी चाहिए | अगर सरकार नौकरी में अलग मानती हैं तो हम बराबर क्यों माने??? फिर हम भी छुआछूत करेंगे | पुरानी रीवाज कि तरह नीचे बिठाएंगे, क्योंकि ये खुद बोल रहे है कि हम दलित है, अनुसूचित जनजाति से हैं। जब ये खुद बराबर आने को तैयार नहीं है तो हम भी ऐसा ही करेंगे और हम ये चाहते हैं कि ऐसा बन्द हो इसलिए ऐसा आन्दोलन करो कि जातिवाद की राजनीति ख़त्म हो और सरकार को झुकना पड़े और सभी को बराबर अधिकार मिले। 100 अंक लाने वाला फेल हो रहा ह और 25 अंक वाला इंजिनियर डॉक्टर बन रहा हैं | ऐसे बनेगा क्या भारत सोने कि चिड़िया । ऐसे तो मिटी कि चिड़िया भी नहीं बनेगा | sc st वालो को शर्म नहीं आती , सुप्रीम कोर्ट का फैसला ग़लत हैं क्या ??? जाँच के बिना गिरफ्तार न हो इनको F.I.R करते ही गिरफ्तारी चाहिए। चाहे निर्दोश ही क्यों न हो और ऐसा होना चाहिए तो फिर सभी के लिए होना चाहिए | आरक्षण मुक्त भारत हो, जिससे मेहनत वालो को ही सफ़लता मिले क्या General. OBC वाले सभी अमिर होते हैं क्या ??? आरक्षण जाति पर नहीं ग़रीब को मिले वह भी निःशुल्क कोचिंग देकर, निःशुल्क पाठ्य सामग्री देकर। कि बेटा अब मेहनत करो और सफ़लता हासिल करो न कि अंको का आरक्षण देकर 40 अंको वाला IAS | क्या ख़ाक जिले को संभालेगा जब 100 अंको वाला सँभालने लायक नहीं है। उससे अच्छा तो फिर OBC जनरल वाले ही अच्छा संभालेंगे जो उनसे ज़्यादा अंक ला रहे है | कब तक देखते रहोगे ??? वहीं युवा भारत वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से भी कहना चाहती हैं कि यह काम तो काँग्रेस ही कर रही थी, फिर आपको क्यों चूना? कुछ तो उम्मीद की होंगी देश के युवाओं ने आपसे । लेकिन वहीं देखा जाएगा तो पायेंगे कि कुल लोगों तक ही आरक्षण सिमट गई हैं और वह समाज के मुख्य धारा में आकर भी अपने पिछड़े भाईयों समुदाय को आगे नहीं आने देना चाहती। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती आने वाली हैं और समाज का वह वर्ग जो आज तक मुख्य धारा में नहीं आ पाया उसे लाने का पहला प्रयास तो उन्हें ही करना होगा जो आरक्षण के बल पर सांसद, विधायक, आईएएस अधिकारी, आईपीएल, सरकारी नौकरियों में है और अपने बच्चों को ही आगे बढ़ाने में लगे हैं। यह वो लोग है जो देश के विकास में कोई योगदान नहीं करते हैं, बल्कि अपनी नईया डुबते देख कमजोर का गला घोंट देते हैं और जातिवाद की घटिया राजनीति करते हैं। अगर यहीं हालात रहा तो इस बात में जरा सा संदेह ना होगा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष होते हुए भारत के पिछड़ो, दलितों के लिए कुछ ना छोड़ा और कुछ समय में ही भारत के संविधान में अमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता होगी।

10-Apr-2018 08:09

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