19-Sep-2019 07:05

हाजीपुर सांसद पशुपति पारस की गुमशुदगी के लिए नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज

जुमलेबाजी के चक्कर में बली का बकरा बनाया गया हाजीपुर लोकसभा सीट को

सर्वविदित है कि रामविलास पासवान 43 वर्षों तक हाजीपुर से सांसद रहे और लगभग समय वह हर सत्ताधारी पार्टी के साथ अपनी सांठगांठ करने में कामयाबी हासिल की है। एक ऐसा सांसद और एक ऐसे सांसद का परिवार जो आरक्षण का लाभ अपने घर तक ही सीमित कर लाखों परिवारों को सड़कों पर लाकर छोड़ दिया, कमोबेश यही स्थिति है एक सांसद की। एक सांसद संसदीय क्षेत्र का अभिभावक कहा जाता है। वह लोकतंत्र की धरती हाजीपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में विफल है और इसी कारण, आज नगर थाना में हाजीपुर क्षेत्र के युवाओं के द्वारा थानाध्यक्ष को आवेदन देकर कहा गया कि महोदय जल्द से जल्द हाजीपुर के सांसद की खोज की जाए क्योंकि वह लापता हो गए। सर्व विदित है कि पिछले कुछ महीनों में हाजीपुर में इतनी ज्यादा हत्या हो चुकी है और उस पर माननीय सांसद पशुपतिनाथ पारस एक भी अभिव्यक्ति, एक भी टिप्पणी सामने नहीं आई। एक सांसद के रूप में अभी तक पशुपति पारस किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम नज़र नहीं आये है। वैशाली के पुलिस अधीक्षक मानव जीत सिंह ढिल्लों जब से वैशाली की बागडोर संभाले, तब से हत्याओं का जिला बनकर रह गया है वैशाली। मानवजीत सिंह ढिल्लों पुलिस अधीक्षक बनकर आए, उस समय रामविलास पासवान यहां के सांसद थे और अब उनके छोटे भाई यहां के सांसद है। जितनी हत्या, जितनी अपराध यहां पर लगातार बढ़ रहा है, उस स्तर में देखा जाए तो हाजीपुर सांसद की जो भूमिका होनी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आती है। हत्या लूट कि इतनी वारदात हो चुकी है, गिनती करना बहुत मुश्किल हो चला है। लोग घर से बाहर निकले या ना निकले, यह दुविधा कि स्थिति बन गई है। क्या सांसद की जिम्मेदारी इतनी ही है ? क्यों संसदीय क्षेत्र में कैसे भी जीता जाए, चाहे वह धन के बल पर हो, या चाहे लूट के बल पर हो या मोदी फोबिया की वजह से जीतने की चाहत है, पर जीत तो जीत होती है और जीत के बाद जिम्मेवारी भी होती है, चाहे आप कैसेभी थे। तो क्या पशुपति पारस को यह नहीं पता है कि हाजीपुर में हो क्या रहा है ? एक ऐसा सांसद जो पिछले 100 दिनों में जीतने के बाद कभी नजर ही नहीं आया ? आखिर कहां है वह सांसद इसकी तलाश होनी चाहिए और पशुपति पारस को न्यायालय में पुलिस द्वारा पकड़ कर सुपुर्द करना चाहिए, और हाजीपुर की जनता को देना चाहिए कि फरार को पकड़ कर लाया गया और वैशाली पुलिस ने कुछ तो काम किया।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में पहली बार ऐसा हुआ है, जब एक सांसद के खिलाफ उसकी गुमशुदगी का रिपोर्ट थानों तक पहुंची है। यह बड़े साहस की बात है कि हाजीपुर के युवाओं ने यह बहुत बड़ा कदम उठाया। अपने सभी साथियों के साथ मिलकर नगर थाना पहुंचे और सभी ने मिलकर 1-1 ने हस्ताक्षर किए और आवेदन पुलिस को दिया। नगर थाना अध्यक्ष के द्वारा पशुपति नाथ पारस के खिलाफ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज किया। जिसकी जांच शुरू की जाएगी क्या ?पशुपति पारस की मानसिक, शारीरिक स्थिति ठीक है या वह ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं कि जहां से उन्हें अपनी जिम्मेवारी निभाने के लिए समय नहीं है या अपने शारीरिक रूप से एवं मानसिक रूप से विकलांग हो चुके हैं। पशुपति पारस अब अपने क्षेत्र में आने से डर रहे हैं या उस लायक बचे नहीं। यह दुर्भाग्य की बात है कि हाजीपुर जैसे लोकतांत्रिक भूमि का सांसद पूर्णरूपेण और अलोकतांत्रिक हो गया है। यह दुर्भाग्य की बात है कि रामविलास पासवान जो आज दलितों के मसीहा कहे जाते हैं, 43 सालों तक हाजीपुर के अपनी ही जाति के लोगों का शोषण किया। किसी को पनपने नहीं दिया। किसी को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी उभरने नहीं दिया। किसी को एक जगह स्थापित नहीं करने दिया। वहीं मौका देखकर मोदी फोबिया में पशुपति पारस को आरक्षण का लाभ उठा हाजीपुर पर थोप दिया। आरक्षण की ऐसी मार पड़ी है हाजीपुर पर, कि पूरी की पूरी हाजीपुर तरस्त है, बेवश हैं। यह ऐसा समय है जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार अलोकतांत्रिक हो चली हैं। सांसद को समय ही नहीं है कि वह अपनी जनता के बीच में जाए। यह बड़ा सवाल है ? क्योंकि राष्ट्रवाद के नाम पर जिस तरीके से वोटों की ठगी नरेंद्र मोदी के नाम पर किया गया। वह दुर्भाग्य का दिन आज हाजीपुर जैसे लोकसभा क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है।

रामविलास पासवान आरक्षण का लाभ लेकर जिस प्रकार 43 सालों तक हाजीपुर एवं अपने ही जाति एवं समाज के लोगों को गुमराह किया, वह दुर्भाग्य पूर्ण हैं। कांग्रेस से लेकर के भाजपा और लगभग हर एक गठबंधन में सत्ता सुख भोगने वाले रामविलास पासवान इस बार अपने पशुपति पारस भाई को भी नरेंद्र मोदी की लहर में सांसद बना लिए। लेकिन दुर्भाग्य है कि नरेंद्र मोदी जो राष्ट्रवादी नेता कहे जाते हैं, देश के प्रति जिम्मेवार कहे जाते हैं, उन्होंने लोकतांत्रिक भूमि पर एक ऐसा सांसद अपने चेहरे के नाम पर दे दिया, जो पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक धब्बा है। किस तरीके से सांसद बनने के बाद एक सांसद को फुर्सत नहीं है। जब उसके जिले में असंख्य हत्याएं हो रही हो और अभी तक अरबों रुपए लूटा जा चुका हैं। उसके बावजूद वह सांसद एक शब्द बोलने को तैयार नहीं है, लिखने को तैयार है नहीं है। किसी के संवेदना के साथ खड़ा होने के लिए समय नहीं है। हाजीपुर के सांसद को किस बात का पैसा मिल रहा है, किस बात की सुविधा मिल रही है ? सभी सुविधाएं जल्द से जल्द समाप्त कर देना चाहिए ? हाजीपुर के वर्तमान सांसद की सदस्यता तुरंत निरस्त करना चाहिए ? क्योंकि इतनी हत्याओं का जिम्मेवार जितना हाजीपुर का पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों हैं, उतना ही हाजीपुर का सांसद पशुपति पारस है श। युवाओं की पहल ऐतिहासिक पहल है और इस ऐतिहासिक पहल में हाजीपुर की संपूर्ण जनता उन युवाओं के साथ हैं। जिन्होंने यह कदम उठाया। हाजीपुर के सांसद की खोज कर कानूनी रूप से प्रस्तुत किया जाए। युवाओं ने हिम्मत दिखाई, हाजीपुर के नगर थाना में जाकर प्राथमिकी दर्ज करने का साहस कर पाए। उन सभी छात्रों से बात होने पर पता चला, कि उन्हें लगातार रामविलास पासवान के लोगों के जो चाटुकार हैं, दिन भर दलाली करते हैं, वह सभी लोग उन सामान्य और छात्र को धमकी देते हैं। अब वह बच्चे और असुरक्षित अपने आपको महसूस कर रहे हैं। सत्य को पराजित करने का प्रयास वाकई में इस देश में हर कोई कर सकता है। तो रामविलास एवं उसकी फैमिली ही कर सकती है। और यही सत्यता के साथ उनके चाटुकार हाजीपुर में लग चुके हैं । और बच्चों को डराने धमकाने एवं उनके साथ कुछ भी अगर होता है तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ रामविलास पासवान और उनके परिवार के लोग दोषी होंगे।

धन कुबेर परिवार से आने वाले सांसद हाजीपुर को अपनी पुश्तैनी संपत्ति समझने वाले रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपतिनाथ पारस 2019 के चुनाव में मोदी के नाम पर हाजीपुर से सांसद हुए। हाजीपुर सांसद चुने जाने के बाद, पशुपति आज तक अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं आते, कहीं दिखाई भी नहीं देते हैं। कुछ समय पहले छोटे भाई की अचानक मृत्यु के बाद वह फेसबुक और टेलीविजन ऊपर दिखाई दिए थे। लेकिन हाजीपुर की जनता के लिए उनकी संवेदना कहीं नजर नहीं आती है। एक सांसद के रूप में पशुपति पारस कितने योग्य हैं, इसका इससे पता चलता है कि हमारी चुनावी प्रक्रिया धन कुबेर पर टिकी हुई है। जिसके कारण ही पशुपति पारस हाजीपुर से सांसद बन गये। इस संबंध में कांग्रेस के युवा नेता राकेश यादव ने कहा कि बच्चों को डरने की जरूरत नहीं है। हम उनके साथ हैं। इस परिस्थिति को लाने में रामविलास पासवान, नरेंद्र मोदी और उनके चहेते भाई पशुपति पारस जिम्मेवार हैं। जिस तरीके से नरेंद्र मोदी अपने चेहरे के नाम पर लोगों से वोट की ठगी की है, उसका परिणाम तो आना यहीं था। नरेंद्र मोदी अपने योग्यताओं को लेकर खुद में अति उत्साही रहते हैं और इसी उत्साह में उन्होंने ऐसे आदमी को हाजीपुर के ऊपर थोप दिया, जो एक कलंक के रूप में आज साबित हो चुके हैं। जरूरत है कि ऐसा सांसद को हाजीपुर से उसकी सदस्यता निरस्त करते हुए, व कानूनी कार्रवाई करते हुए, जेल की सलाखों के अंदर डाल देना चाहिए।

19-Sep-2019 07:05

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