05-Nov-2018 10:32

हाजीपुर का राजनैतिक विकास के लिए आ रहे मनोज शुक्ला

लगभग 20 वर्षों में हाजीपुर की भौगोलिक परिस्थितियाँ बहुत बदल गई। लेकिन बदलाव का परिणाम विकास की जगह विनाश की ओर गया। युवाओं पर हावी चल रहे हैं गुमराह करती राजनीति।

विश्व एक पहले लोकतांत्रिक गणराज्य वैशाली का प्रमुख अंग हाजीपुर हैं। हाजीपुर, वैशाली जिला का मुख्यालय हैं और प्रमुख विकसित कस्बा। हाजीपुर को एक चौक-चौराहे से बढ़ाकर यहाँ के सांसद और विधायक कस्बे तक ही बदल पाये। हाजीपुर का इतिहास एक गौरवशाली इतिहास को हाजीपुर के ठेके का सांसद और उग्र विचारक विधायक ने पिछले 20 वर्षों में ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रतिनिधियों से आशा करने वाली जनता में सिर्फ विधायक के खिलाफ जाने से अपने मौत की आहट सुनाई देती रही हैं। वहीं हाजीपुर मुख्यालय के साथ साथ ऐतिहासिक कौनहारा, पतालेश्वर मंदिर, आदि हरिहरनाथ मंदिर, भारत के भरत के मंदिर, रामचौरा मंदिर, विश्व के सबसे बड़े विद्वानों की कर्म स्थली यही रही हैं। लेकिन हमारे विधायक जो सदनों द्वारा खुद को माननीय बना लिया हुआ है वो हाजीपुर की जनता के दिलों में जगह नहीं बना पायें। मीठी वाणी के बल पर कुरूर व्यवहार से पिछले 20 वर्षों में हाजीपुर की जनता, युवाओं और बुजुर्गों को राजनैतिक रूप से सब नहीं होने दिया। इसलिए हाजीपुर को एक ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो हाजीपुर को पोषित करे ना कि शोषित। हाजीपुर की युवाओं को राजनैतिक स्वतंत्रता के साथ साथ एक सामूहिक अभिभावक की आवश्यकता है। इसलिए प्रतिनिधित्व करने के लिए जो भी आगे बढ़े वह परिवारिक, सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य पर अपनी बेहतरीन समक्ष रखता हो।

लंबे अरसे से हाजीपुर लोकसभा व विधानसभा पर अपनी राय देता रहा हूँ और उसका परिणाम भी देखा है। सांसद का 42 सालों में अपना स्थाई घर ना बना पाना जहाँ सांसद के लिए संकट बना, उन्होंने आनन फानन में मठ - मंदिरों के जमीन पर अपना घर बनाना शुरू कर दिया। कार्याकर्ताओं के माध्यम से ईंट, बालू, गिट्टी से लेकर मजबूर तक खर्च सीट देने के नाम पर ठंग रहे हैं। घर का निर्माण जारी हैं और कई लोगों को जमीन को लेकर जान से मारने व तरी-पार कराने तक की धमकी भी दि जाती हैं। सांसद जिला का अध्यक्ष है और किसी संस्था का प्रमुख ही लालची हो तो बाकियों पर आशा बेमानी सी लगती हैं। हाजीपुर के सांसद 42 वर्ष पहले हाजीपुर के प्रतिनिधि बने और आज तक अपने आरक्षित श्रेणी के लोगों का विकास नहीं कर पायें। सांसद महोदय ने 42 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, कृषि, के क्षेत्र में कोई काम नहीं कर पायें। आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ना उस समाज को विकसित करने के लिए अधिकार दिया जाता है। लेकिन दुर्भाग्य है कि हाजीपुर के सांसद 42 वर्षों में शिक्षा को मजबूती नहीं दे पाये और ना ही अपने ही समाज के 0.000001% लोगों को भी शिक्षित कर पाये। अनेकों पार्टियों से चुनाव लड़ने के बाद अपनी पारिवारिक राजनैतिक पार्टी बनाकर हर वर्ग को राजनीति का शिकार बनाये। इसी कारण 20-25 सालों से सांसद हाजीपुर के राजनैतिक पार्टियों के सदस्यों ने अपना जीवन दीमक की तरह चुसवाँ कर अब बाहर चले और राजनैतिक उत्थान के लिए नई राहे लेने को विवश हो गए।

वहीं, हाजीपुर का विधानसभा क्षेत्र राजनैतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। सांसद को जहाँ विश्व पटल पर खड़ा किया तो विधायक को महाशक्तिवाली बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा। जिसका परिणाम ही हैं कि हाजीपुर के महाबली विधायक, विधानसभा से लोकसभा तक का सफ़र तय कर आज बिहार के प्रमुख राजनैतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष बनकर बाहुबली बनकर बैठे हैं। हाजीपुर कृषि क्षेत्र में प्रमुख रूप से केले के लिए नामी हैं और उसी के वजूद के लिए हरिहरपुर में कृषि अनुसंधान केंद्र बनाया गया था, जिसे विधायक रहते ही ध्वस्त कर दिया। अपराधिक घटनाओं में दर्जनों प्राथमिकी, हत्या काण्डों में भी मौजूदगी, जमीन हरपने, दुकान खाली कराने, सड़कों पर दुर्घटना कराकर गाड़ियों को बदलने, नये लोगों से मिलने में डर और समय देकर गुमराह करना आदि मुख्य पेशा रहा है। आजकल कुछ समयों में लगभग कुछ प्राथमिकी से बाहर प्रशासनिक व्यवस्था के साथ मिलकर कर लिया। लोकसभा का सफ़र करने के साथ ही अपने गुलाम को हाजीपुर का विधायक बना दिया। आज हाजीपुर में विधायक कम एक पूर्व विधायक व वर्तमान सांसद का हुकूमत बहाल करते विधायक आपको नजर आएँगे।

अब जो बातें करने जा रहा हूँ वह यह कि क्या राजनीति की नई पारी खेलने उतरने जा रहे मनोज शुक्ला हाजीपुर को सम्मान दिला पाएँगे। हाजीपुर के सांसद रामविलास पासवान के पारिवारिक राजनैतिक पार्टी का सफ़र 20 वर्षों बाद छोड़ा, अब काँग्रेस का दामन थाम रहे मनोज शुक्ला। मनोज शुक्ला पूर्व में भी कई राजनीतिक लड़ाईयों के माध्यम से अपना वजूद साबित कर पाये हैं। सुनने में आया है कि मनोज शुक्ला 27 नवंबर 2018 को हाजीपुर के अक्षयवट राय स्टेडियम में काँग्रेस का दामन लगभग कई हजार लोगों के बीच लेंगे। अपने राजनीति का महत्वपूर्ण सफ़र रामविलास पासवान के सानिध्य में करने का बड़ा प्रयास करने वाले श्री शुक्ला अपना वजूद इसबार बना पायेंगे। महागठबंधन की तरफ से भी एक नई उम्मीदर को जातिय समीकरण के अनुसार की पहल लालू यादव के इशारे पर कर चुकी हैं। वहीं मनोज शुक्ला ने जमीनी हकीकत को भापते हुए समय रहते काँग्रेस में जाने का निर्माण लेकर राजनीतिक मठाधीशों के गले की हड्डी बन गए हैं। अगर मनोज शुक्ला को महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया गया तो 42 साल और 20 साल के राजनैतिज्ञों की नींद उड़ जाएँँगी।

05-Nov-2018 10:32

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