11-Jul-2019 10:14

लाख सेंधमारी के बाद भी सुरेश कुमार फिर बने मुजफ्फरपुर के महापौर

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय , राजनीति का दाव समझ लें वही पंडित होय,आज नंदू बाबू किधर है ?

राजनीति में मित्र कठिन है ,सर्व से उठा चरित्र कठिन है, एक जुआरी के अड्डे पर वातावरण पवित्र कठिन है, कल के दोस्त बने दुश्मन और कल के दुश्मन आज दोस्त और खेवनहार बने। यह कहते हुए सुनील पाण्डेय जद यू नेता मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्राह्मण विकास मोर्चा ने बताया कि एक बार फिर सुरेश कुमार ही बने महापौर मुजफ्फरपुर के। मुज़फ़्फ़रपुर के हाई लेवल ड्रामा के बाद अपने ही समर्थकों के द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ पुनः चुनाव में विजयी हुई पूर्व मेयर सुरेश कुमार। हालांकि इस दौरान मुज़फ़्फ़रपुर के आम लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा क्योंकि जबकि पूरे शहर में जलजमाव हैं जनता के द्वारा चुने गए कई पार्षद अपने वोट के लिए एक मोटी रकम ले कर नेपाल यात्रा पर थें।

मुजफ्फरपुर का कौन बनेगा मेयर फैसला आज हो गया। मुजफ्फरपुर नगर निगम का ताज एक बार फिर पूर्व महापौर सुरेश कुमार के सिर होगा या वार्ड तीन के पार्षद राकेश कुमार के फैसला आज ही होगा। आज गुरुवार को समाहरणालय सभागार में महापौर का चुनाव होना था। प्रशासनिक तैयारी पूरी थी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मालूम हो कि 15 जून को सुरेश कुमार के अविश्वास प्रस्ताव हारने के बाद यह कुर्सी खाली थी। महापौर को कुर्सी से पदच्युत करनेवाले पार्षदों के खेमे ने सशक्त स्थायी समिति सदस्य व वार्ड तीन के पार्षद राकेश कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं, अविश्वास प्रस्ताव में मात खा चुके खेमे ने उनके मुकाबले नया उम्मीदवार खड़ा करने की जगह सुरेश कुमार को ही फिर से मैदान में उतारा गया था।

दूसरी ओर अज्ञातवास पर गए दोनों खेमों के तीन दर्जन पार्षद देर रात शहर लौट आए। अपने-अपने समर्थक पार्षदों को एक साथ रखा था सभी गुटों ने। वे अब घर नहीं जाकर सीधे समाहरणालय पहुंच रहे थे ताकि चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकें, बिना इधर उधर करने के। देर रात तक दोनों खेमा अपने-अपने पार्षदों के साथ चुनावी रणनीति बनाते रहे और फिर जो आज हुआ वह सर्वविदित है।

सुनील पाण्डेय ने बताया कि देर रात तक चला सेंधमारी का प्रयास जारी रहा था। महापौर की कुर्सी को लेकर दोनों खेमों के सिपहसालार देर रात तक एक-दूसरे के कैंप में सेंधमारी का प्रयास करते रहे। पार्षदों के साथ उनके दोस्तों एवं रिश्तेदारों की मदद से पार्षदों का मन बदलने का प्रयास किया जाता रहा। मुकाबला कांटे का होने के कारण एक-एक वोट को अपने पक्ष में करने की कोशिश होती रही। लेकिन अंतिम विजय तिलक फिर महापौर मुजफ्फरपुर के रूप में सुरेश कुमार के सर ही चढ़ा। 5 वोट अधिक पाकर मेयर बने सुरेश कुमार। सूत्रों के हवाले से राकेश कुमार पिंटू के पक्ष 22 वोट और सुरेश कुमार के पक्ष में 27 वोट पड़े।

11-Jul-2019 10:14

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