29-Nov-2018 04:16

मेरी नज़र में राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा : मनीष कुमार सिंह

अखंडता का प्रतीक भारत में राजनैतिक दलों की बढ़ती दखलंदाजी से राष्ट्रीय एकता को भारी खतरा है, जिसके लिए बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका में राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा।

लोकतंत्र की भूमि पर भारत ने हमेशा से गर्व महसूस किया है। लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के कारण ही वैशाली का अपने आप में अलग महत्त्व हैं। वैशाली का लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो योगदान रहा है, उसका ही परिणाम है कि आज फिर से यहाँ से लोकतंत्र की मजबूती के लिए कदम उठाया गया है। अभी तक के राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के सफ़र ने यह तय कर दिया कि उत्तर बिहार अपने लोकतंत्र की रक्षा के लिए फिर से कटिबद्ध हो चुका है। इसका एक बड़ा महत्व 25 फरवरी 2019 को गाँधी मैदान में होने वाले राष्ट्रीय संवाद में महारैली में होगा। ज्ञात हो कि ई. रविन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में एक टीम 2 अक्टूबर 2018 से शुरू किया गया है। याद रखने वाली बात यह हैं कि यह राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा उस भूमि से हुआ जहाँ से मोहनदास करमचंद गाँँधी को महात्मा गाँँधी बना दिया है। वह मोहनदास करमचंद गाँँधी जब महात्मा गाँँधी बने तो एक मात्र व्यक्तित्व पं. राजकुमार शुक्ल की पैनी नज़र का परिणाम ही था। पं. राजकुमार शुक्ल ने चम्पारण की धरती पर मोहनदास करमचंद गाँँधी को बुलाकर भारत के आजादी की नींव रखी और आजादी के चाणक्य की भूमिका निभाई।

ई. रविन्द्र कुमार सिंह द्वारा अपने सामाजिक व राजनैतिक सोच़ के साथ एक सशक्त टीम बनाकर राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा की नींव रखी। पहली बार जातिवाद, धर्मवाद के नाम पर सामाजिक न्याय की नींव रखी गई हैं। भारत की आजादी के पहले से ही एक पक्ष और दुसरा विपक्ष तैयार हुआ। जिसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका में सामने आई भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस तो एक सामाजिक संगठन के नाम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। एक राजनीतिक दलों को बढ़ावा देने का काम किया तो दूसरे ने धर्म की शाखाओं को बढ़ावा दिया। जिसका ही आज परिणाम है कि भारत में हजारों राजनीति दलों और हजारों सामाजिक संगठनों का निर्माण हो गया। लेकिन दोनों प्रमुख संगठनों ने कभी राष्ट्रीय स्तर पर विकास की धारा नहीं बना पाई है। इसका परिणाम ही आज है कि राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रवादी संगठन का निर्माण हो। जिसे राष्ट्रीय समान अधिकार की टीम ने महसूस किया।

अभी लगभग दो महीने का सफ़र तय हो चुका है और 14 जिलों का सफ़र तय कर निरंतरता से ई. रविन्द्र कुमार सिंह की टीम जनसंपर्क कर रही हैं। लगभग 180 जनसंपर्क सभा व बैठक के माध्यम से 1,48,000 लोगों से संपर्क किया गया। यह सफ़र एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण से स्वतंत्र भारत का ए राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनेगा। इतने बड़े स्तर पर एक टीम का आम लोगों से मुलाकात सामूदायिक एकता का प्रतीक बनता जा रहा है। ई. रविन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व को आज पूरा बिहार स्वीकार कर रहा हैं, वह भी इस उद्देश्य के साथ कि सामुहिक बदलाव स्थापित होगी। इसलिए राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के साक्षी टीम की बड़ी जिम्मेदारी बन जाती हैं कि वह राष्ट्रहित में एकता को सुदृढ़ बनाये रखें। राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा को लेकर ई. रविन्द्र कुमार सिंह सशक्त रूप से मानसिक रूप से सुदृढ़ हैं। ई. सिंह समानता के लिए एकल नीति को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। राजनीतिक दलों द्वारा सामाजिक रूप से जातिवाद के नाम पर राष्ट्र के टुकड़े कर रखे हैं और श्वसन एक वर्ग को कर रही हैं। याद रखने की जरूरत है कि भारत व राज्यों की सरकारों द्वारा अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाने को लेकर सामाजिक न्याय के नाम पर सवर्णों पर काले कानूनी प्रक्रिया के तहत आत्महत्या करने पर मजबूर करती आ रही हैं। जबकि भारत व राज्यों की सरकारों को संचालित करने के लिए 1947 में भी धन दिया था और आज भी भारत की अर्थव्यवस्था को सवर्ण समाज द्वारा 90% तक मजबूत बनाये हुए हैं। लेकिन भारत सरकार के प्रधानमंत्री तक अपनी जातिवादी और धर्मवादी सोच़ के कारण भायत की अखंडता के लिए खतरा पैदा कर चुके हैं। वहीं राज्यों में मुख्यमंत्री भी अछूते नहीं है और वो भी जातिवाद और धर्मवाद के नाम पर सामाजिक एकता को ध्वस्त कर चुके हैं। इसलिए राष्ट्र का विकास बाधित हो चुका हैं और सामाजिक न्याय की जगह राजनैतिक महत्वाकांक्षा ने जगह बना ली हैं।

इसलिए राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा एक व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय एकता पर कार्य कर रही हैं। आज यह यात्रा सवर्णों (भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत व कायस्थ) को एकजुट कर फिर से सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध हैं। इस यात्रा के माध्यम से उस वर्ग को एकत्रित किया जा रहा है जो हमेंशा से भोजनयुक्त व रोजगारयुक्त समाज बनाकर खुशहाल भारत का निर्माण किया है। ई. रविन्द्र कुमार सिंह राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के संयोजक के रूप में खुद राजपूत समाज, साथ में सह-संयोजक सुजीत कुमार जो भूमिहार समाज, साथ ही साथ सह- संयोजक सुनील पाण्डेय ब्राह्मण समाज से नेतृत्व संभाल कर आगे बढ़ रहे हैं। सामाजिक न्याय के रूप में राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनेगा यह विश्वास के साथ पुरा बिहार आँखे बिछाये बैठा है। राजनीतिक दलों की 72 वर्षों की राजनीति पर ग्रहण के रूप में स्थापित होगी राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा।

29-Nov-2018 04:16

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