27-Dec-2019 03:48

मामला लालू की बहू ऐश्वर्या का: सड़क पर छितराए रिश्ते : अर्जुन भारतीय.

सियासी दोनों घराने की अपनी पृष्ठभूमि है। चंद्रिका राय की पुत्री ऐश्वर्या की शादी लालू के पुत्र तेज प्रताप के साथ 1 साल पहले हुई थी।

आज राजधानी पटना में लालू की बहू ऐश्वर्या के सामान राबड़ी देवी द्वारा उसके पिता चंद्रिका राय के घर भिजवाने को लेकर भारी बावेला मचा हुआ है। बहुत भारी, कुछ ही समय पहले ऐसा ही बवाल तब मचा था, जब लालू के घर से ऐश्वर्या निकाली गई थी। कुछ महीने पहले फिर वह वापिस आई। उसके कुछ ही समय बाद वह फिर निकाली गई। रिश्ते की सड़क पर ऐसी लड़ाई पहले नहीं दिखाई पड़ी थी। सियासी क्षेत्र के दो बड़े परिवारों के बीच नए सिरे से घमासान मचा हुआ है। ऐसा घमासानतोसामान्य परिवारों में भी दिखाई नहीं देता है। चतुर्दिक जग हंसाई हो रही है। रिश्ते की लड़ाई की गूंज ऐश्वर्या -तेजप्रताप की शादी के बाद से ही ना सिर्फ बिहार में, बल्कि इसकी गुंज कमोबेश पूरे देश में सुनाई देती रही है। लड़ाई घटने के बजाय आकाश छुती दिखती है।

सामान देने और न लेने के जंग में रात देर तक रस्साकशी चलती रही। लालू जी की बेटी मीसा भारती ने इस मुद्दे पर प्रेस के सामने कहा कि उनके परिवार की राजनीति को बदनाम किया जा रहा है। राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास भी परोक्ष रूप से मिसा भारती ऐश्वर्या के पिता विधायक एवं पूर्व मंत्री चंद्रिका राय पर दोष मढरही थी और अपने परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि को उत्कृष्ट बता रही थी। दूसरी तरफ अपनी बेटी की शादी के समय से ही तनाव में चल रहे चंद्रिका राय बेहद गुस्से में दिख रहे थे। सियासी दोनों घराने की अपनी पृष्ठभूमि है। चंद्रिका राय की पुत्री ऐश्वर्या की शादी लालू के पुत्र तेज प्रताप के साथ 1 साल पहले हुई थी।

इस बेमेल शादी पर उसी समय बहुतेरे लोग लेकिन -परंतु उठाते थे। तेजप्रताप या शादी नहीं चाहते थे -लेकिन लालू यादव शादी के पक्षधर थे। लालू जी के दिमाग में शायद ऐश्वर्या के दादा प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी एवं आजादी के बाद से विधायक, मंत्री तथा मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय दरोगा राय जी की विरासत की चमक दमक रसी- बसी थी। ऐश्वर्या के पिता चंद्रिका राय लालू -राबड़ी की सियासत से शायद प्रभावित थे। तभी शादी हुई थी, लेकिन शादी के दिन से ही तेज प्रताप ऐश्वर्या से दूरी बनाए रखे थे और आज तो दोनों की दूरी आग में तब्दील हो गई है। दोनों की लड़ाई से दूसरे लोग आहत तो है', ही पार्टी के लोग कुछ ज्यादा ही आहत हैं। रिश्तो की यह लड़ाई राजनीतिक पृष्ठभूमि की बेमेल होने के कारण परवान चढ़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू -राबड़ी की सियासी पृष्ठभूमि अलग है तथा पूर्व मुख्यमंत्री स्वाधीनता सेनानी स्वर्गीय दरोगा राय- चंद्रिका प्रसाद राय की अलग। स्वर्गीय दरोगा बाबू आजादी की लड़ाई से लेकर मरने के दिन तक पूरे राज्य में एक ईमानदार, चरित्रवान तथा सच्चे जनसेवक के रूप में जाने पहचाने जाते रहे थे।

आदर्श पुरुष के रूप में दोनों परिवारों के बीच इस पृष्ठभूमि के कारण ही रिश्ते की लड़ाई आकाश छूने लगी है। सियासी लड़ाई नहीं है, पारिवारिक लड़ाई है। फिर भी राजनीतिक हो या सार्वजनिक जीवन इसमें हर बिंदु पर पारदर्शिता एवं आचरण केआधार पर लोग पृष्ठभूमि का आंकलन करते हैं ? लोकतंत्र का तकाजा भी है कि राजनीतिक आदमी के हर कार्य से जनता को अवगत होने का हक है। निर्वाचित प्रतिनिधियों से तो और भी इसीलिए पारिवारिक लड़ाई होते हुए भी इसका दायरा सियासी क्षेत्र में भी हंगामा बरपाने तक पसरा हुआ है। धधकती आग की तरह ? यक्ष सवाल है कि प्रदेश -देश चलाने का दावा करने वाले लोग खुद के परिवार को नहीं चला सकते क्यों ? दावेमें कितना खोखलापन है।

27-Dec-2019 03:48

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