17-Apr-2018 01:15

महादलितों के शोषक के साथ लालू, बड़ा मौसम वैज्ञानिकों बनाने की तैयारी

काराकाट से सांसद मननीय केंद्रीय राज्य मंत्री, उपेंद्र कुशवाहा , मानव संसाधन विकास, महादलितों के मसीहा बनते फिर रहे हैं लेकिन उनके क्षेत्र में ही लोगों को जीवन जीने के लिए दो वक्त की रोटी और ईलाज के लिए पैसे नहीं हैं।

हर वक्त एक जैसा नहीं होता, उसी तरह रामविलास पासवान को पीछे छोड़ते उपेंद्र कुशवाहा बड़ी उपलब्धि की ओर। सावित होंगे मौसम वैज्ञानिक के गुरु माननीय कुशवाहा। एक बड़ी खबरों.के अनुसार अपने क्षेत्र में महादलितों के मसीहा नहीं करते भ्रमण, बता दें कि गोह प्रखंड के पोखराहा निवासी विनय दास पहले अपनी पत्नी सोना देवी के इलाज के लिए परेशान रहा अब पत्नी की मृत्युपरांत भोजन के लिए संघर्ष कर रहा है।महादलित समाज से होने के बावजूद विनय को न तो रहने का छत सरकार से मिला है ना ही खाने को राशन मिलता है।अम्बेडकर जयंती के दिन अन्न के अभाव में अपने तीन बच्चो को भूख से व्याकुल देखकर विनय सामाजिक कार्यकर्ता वेंकेटेश शर्मा से मदद मांगते हुए कहा कि एक तरफ अम्बेडकर जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है तो दूसरी ओर हमारे बच्चे भूखे सोने को विवश हैं। अब आप ही हमारे बच्चो को बचा सकते हैं।वेंकटेश ने विनय को कुछ आर्थिके सहयोग देते हुए सोमवार को सुबह 10 बजे से सायं 4 बजे तक का सांकेतिक उपवास रखा। उपवास में वेंकेटेश को सहयोग देने हेतु विनय एवं विनय के बच्चो के अलावा राजेन्द्र ठाकुर जिनका इलाज दिल्ली एम्स में वेंकटेश के माध्यम से चल रहा है, शिवशंकर चौधरी जिनके बहु का इलाज वेंकेटेश ने एम्स में कराया था। विनय ने प्रखंड पदाधिकारी को कहा कि अगर वेंकटेश बाबू न रहतन हल तब हमनी सब परिवार न बचती हल। पांच वर्षिय शिवम ने लोगों को बताया कि हम दो दिन से भर पेट खाना न खाइली हे। विनय के परिवार की स्थिति को देखकर वहां उपस्थित कर्मचारियों ने कुछ आर्थिक सहायता भी की। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने उसकी स्थिति को देखते हुए तुरंत राशन कार्ड बनाने के लिए कहा तथा डीलर को अनाज पहुंचाने को कहते हुए कहा हम व्यक्तिगत स्तर पर भी जब जरूरत हो मदद करते रहेंगे।विनय ने बताया कि हमारे पास हमारी स्थिति से अवगत होते हुए भी कोई भी जनप्रतिनिधि पंचायत स्तर से लेकर लोकसभा स्तर तक नही आया। अपने क्षेत्र के लोगों की सध नहीं लेने वाले माननीय केन्द्रीय राज्य मंत्री वैशाली में नये नये राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए डरामा करते हैं। मिली जानकारी के अनुसार मंच साझा नहीं करने और विश्वास प्राप्त करने की कवायत में राजनीति का ही स्तर बद दिये वर्तमान मानवता संस्थान विभाग के राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा। सर्वविदित है कि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए सरकार के गठबंधन में होते हुए भी गठबंधन का कोई धर्म नहीं निभाये। माननीय हमेशा सरकार में होते हुए सरकार के विपरीत का कर रहे है वो भी नई सत्ता की पारी के लिए। सासंद बनते ही मुख्यमंत्री बनने की चाहत में बिहार में जातिवाद को सबसे ज्यादा हवा पिछले चार सालों में कोई नेता ने दिया तो वह केन्द्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा हैं। एक शिक्षक होते हुए भी उन्होंने शिक्षा में कोई आयाम हासिल नहीं किया। वहीं शिक्षा से कोसों दूर तक रिस्ते ना होने के बावजूद इतिहास की ऐसी की तैसी कर जातिवाद को जन-जन तक पहुँचने का काम करने में सफल रहें। उपेंद्र कुशवाहा की सबसे बड़ी शिक्षा का स्तर तब स्पष्ट हो गया था जब ईसा पूर्व में जन्म लिए महान सम्राट, सम्राट अशोक की जाति तक बता डाला। प्रत्येक महापुरुष जो राष्ट्र हित में काम करते रहे हैं उन्हें जातियों में विभक्त कर समाजिक व्यवस्था पर गहरा चोट किया। शिक्षा मंत्री होते हुए शिक्षा रैली तो कभी शिक्षा पर भिक्षाटन कर शिक्षा मंत्री अपनी गहरी शिक्षा का स्तर प्रदर्शित करने में लगे हैं। लेकिन आम आदमी जो यह नहीं समझ पा रहा कि राजनेता किसी के नहीं हैं। अपने स्वार्थों के लिए वह कुछ भी करेंगे। अपने गृह क्षेत्र से विधायक और अभी दूसरे के घर में ताकझांक के बावजूद किसी भी क्षेत्र का विकास करने में विफल हैं। राजनीति की एक नई परिपाटी का यह प्रमाण मालता है कि अंबेडकर के नाम पर भी राजनीतिक दलों ने खुब खेल खेला हैं। लेकिन सामाजिक विचारों में अब आई गिरावट ने तह सावित कर दिया कि आने वाला समय समाज को जाति के बाद अपने सगे भाइयों के बीच भी राजनीतिक दल करेंगी। जिसका प्रमाण यह है कि 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद में सभी राजनीतिक दलों ने नंगा नाच किया और समाज को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के माध्यम से बिखेर कर रख दिया। जिसमें उपेंद्र कुशवाहा जी का योगदान सराहनीय नजर आया। वहीं एक और बंदी में 10 अप्रैल 2018 को एक और जातिवाद का स्त्रोत सामने आया और राजनीति की ऐसी विसाद बिछाई गई कि अच्छे अच्छे नेताओं की राजनीति उपेंद्र कुशवाहा जी ने खत्म कर दिया। बहुत बड़ी खबर यह है जो कि एक विशेष सूत्रों द्वारा बताया गया कि लालू प्रसाद यादव के भरोसे को जीतने के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने हाजीपुर के जमालपुर गाँव में उनके साथ बदसलूकी की बातों की हवा उड़ाई गई। जबकि घटना शुभई गाँव की है और लोगों ने उन्हें सम्मान के साथ बैठाया और बाद में जाने को कहाँ। वहीं मिली जानकारी के अनुसार घटना बराँटी थाना क्षेत्र का दिखाया गया और कुछ की गिरफ्तारी भी कर ली गई। जिसके बाद उपेंद्र कुशवाहा जी ने लालू प्रसाद यादव का विश्वास भी जीता और प्रधानमंत्री की इज्ज़त भी रख ली और एक नया राजनैतिक मुद्दा भी जुटा लिया। वहीं बता दे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजकल उपेंद्र कुशवाहा के कार्य करने के तरीकों से काफी खफा चल रहे हैं। भारत सरकार एवं एनडीए गठबंधन के विरूद्ध कार्यक्रमों के कारण गठबंधन जबर्दस्ती चल रही हैं। लेकिन बिहार की राजनीति में उथल पुथल करने की तैयारी इसलिए हो रही है ताकि नीतीश कुमार का कोई विकल्प तैयार हो सके। लालू यादव का साथ जैसे ही नीतीश कुमार ने छोड़ा वैसे ही उपेंद्र कुशवाहा के पास मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। राजनीति कब करवट ले यह आज बिहार में लालू प्रसाद यादव से बेहतर कौन समझ सकता है, इसलिए अब उपेंद्र कुशवाहा को एक मौका देकर अपने पुत्रों की राजनीति बचाये रखने की नई तैयारी कर रहे हैं। जिसमें उपेंद्र कुशवाहा पहली परीक्षा में पास हो गए चंपारण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच नहीं साझा कर और जातिगत उन्माद भी खड़ा कर 10 कदम आगे बढ़ गयें।

17-Apr-2018 01:15

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