18-Jun-2019 03:51

भगवान और प्रकृति पर भी धारा 144

भगवान के नाम पर वोट माँगने वाले ही लगों ने दिया भगवान को झटका, लगा दिया धारा 144

ईश्वर ने जब इस सृष्टि का सृजन किया तब वह ऐसा नहीं सोच़े होंगे कि यहीं मानव दानवों की भाँति भगवान को ही टक्कर देने को तैयार हो जाएगा। यह वह दौड़ा हैं भारत में जब राजनीति की बुनियाद ही धर्म के नाम पर चलाया जाता हैं। मानववादी बातों से परें व्यक्तिवादी मुखौटों पर खेल रहा भारतीय राजनीति की विनाश का वक्त सामने खड़ी नज़र आ रही हैं। ईश्वरीय शक्ति के साथ जो प्रकृति मानवता को पोषित करते रही हैं, उसे संकट में खड़ा कर मानव ईश्वर के प्रति जागरूक होने की जगह उन पर अपनी कानूनी वार करने की मूर्खता कर रहा है। अब वाकई समय आ गया है कि मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रवाद और सत्य सनातन से उपर उठकर ईश्वरीय शक्ति पर कब्जा कर लिया जाए। ईश्वर ने सोच़ा कैसे अब यह सवाल भारतीय सदनोंं में गुँजेंंगा। श्रीराम के अस्तित्व को विनाश करने में लगी भारतीय राजनीति ने एक और मुर्खतापूर्ण कदम उठाकर अपनी सीमाओं को भूलने का काम कर दिया है। जिस ईश्वरीय शक्ति की ही देन हैं कि आज हम मानव शरीर में है। प्रकृति के रूप में जीवन की शैली, संस्कृति, संस्कार की उत्पत्ति से सृष्टि के सृजन का मार्ग प्रसस्त होता हैं, उसी प्रकृति पर लगा भारतीय संविधान की धारा 144।

जानकारी बढ़ाने के लिए पहले जाने क्या होता हैं, धारा 144? जानिए कहती है सीआरपीसी की धारा-144 ? जब हमारे दिलों दिमाग पर धारा 144 की बातें आती हैं तो हमें याद आता हैं कि पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लगा दी है। कहीं भी किसी भी शहर में हालात बिगड़ने की संभावना या किसी घटना के बाद धारा-144 लगा दी जाती है।आईए जानते हैं कि आखिर धारा-144 है क्या और इसका पालन न करने पर क्या सजा हो सकती है। क्या है धारा-144 सीआरपीसी के तहत आने वाली धारा-144 शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है। इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी एक नोटिफिकेशन जारी करता है। और जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती है, वहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते हैं। इस धारा को लागू किए जाने के बाद उस स्थान पर हथियारों के लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी जाती है।

इस धारा में क्या है सजा का प्रावधान, यह जानते हैं कि धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। उस व्यक्ति की गिरफ्तारी धारा-107 या फिर धारा-151 के तहत की जा सकती है। इस धारा का उल्लंघन करने वाले या पालन नहीं करने के आरोपी को एक साल कैद की सजा भी हो सकती है। वैसे यह एक जमानती अपराध है, इसमें जमानत हो जाती है। क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है। यह सन् 1973 में पारित हुआ था। इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया। दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है। जब कोई अपराध किया जाता है, तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं, जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है। एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है। सीआरपीसी में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है।

भगवान के खिलाफ लगने वाला पहला यह कानून हैं, जो आम आदमी द्वारा प्रकृति के खिलाफ की तैयारी का हैं। यह खराब व्यवहार की इजाजत नहीं देता कानून। कुछ प्रकार के मानव व्यवहार ऐसे होते हैं जिसकी कानून इजाजत नहीं देता। ऐसे व्यवहार करने पर किसी व्यक्ति को उसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं। खराब व्यवहार को अपराध या गुनाह कहते हैं। और इसके नतीजों को दंड यानी सजा कहा जाता है। आज यह समझने की जरूरत है कि आखिर यह नौवत क्यों आ गई कि आदमी को प्रकृति के लिए कानून का सहारा लेना पड़ रहा है। जिस बात के लिए धारा 144 लगाया गया है उसके लिए सिर्फ और सिर्फ जिम्मेदार हैं तो वह हैं भारत की सदन। चाहे लोकसभा हो, चाहे राज्यसभा, चाहे हो विधानसभा, या चाहे हो विधानपरिषद, ये सभी अपनी लूट खसोट को छुपाने के लिए नौकरशाही के माध्यम से गुमराह करने में लगी हैं। याद करें कि मनरेगा योजना और नरेगा योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण का काम हुआ था। कहाँ गये वो अरबों वृक्ष जो प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए लगाया गया था। मुखिया से लेकर विधायक और सांसद से लेकर मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री तक वृक्षारोपण कर खुब फोटों खिचवाते रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ना जाने कहाँ वृक्ष रोपण किया, जो पेपरों की सुर्खियों में रहें। यह राजनैतिक महत्वाकांक्षा का अपराधिकरण हैं, जिसके लिए आज समाचार पत्रों को भी उन जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से सवाल करने की जरूरत है कि पेड़ कहाँ लगाये थे। जो आज प्रकृति पर नियंत्रण करने के लिए धारा 144 लगाने की नौवत आन पड़ी।

18-Jun-2019 03:51

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