08-Jun-2019 12:19

पानी पानी को बेहाल जिंदगी, लेकिन सत्ताभोगी जश्न में उड़ा रहे राष्ट्रवाद

जीवनदायनी लोकतंत्र ने राजनीति को एक आयाम पर रखा, लेकिन व्यक्तिवादी लोकतंत्र ने मानवीय संवेदना को ही खत्म कर दिया।

जनता को गुमराह और गुनेहगार बनाने में सफ़लता पाते प्रशासन और जनप्रतिनिधि। लूटेरे जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक महकमा खुब तालठोक कर लूट मचाये हुए हैं। प्रशासन को दिया जाने वाला पत्र आजतक आँफिस की फाईलों में ही सिमट कर रह गई हैं। जिलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त तक को दिया जाने वाला पत्र, एक मामूली सा कागज का टुकड़ा मात्र है। फिर प्रशासन गुमराह कर गए पटिल्ही की जनता को और इंतजार की राह पकड़ा गई। बिहार सरकार की सात निश्चय योजनाओं की विफलता एक बड़ा सवाल उठा रही हैं। तो वहीं कुछ लंबे इंतजार के बाद हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के अफजलपुर धोबघट्टी पंचायत स्थित पटिल्ही गाँव के लोगों अपने आक्रोश जताना पड़ा। ज्ञात हो कि लगभग 10 महिने पहले जल नल योजना के तहत वार्ड 8 क्षेत्र में मोटर गाड़ा गया था। लेकिन आज तक किसी भी वार्ड क्षेत्र की जनता को एक बुंद पानी प्राप्त नहींं हुआ। वहीं वार्ड सदस्य अपने घर के सारे काम उसी से किया करते थे। गाँव के लोगों को पानी की समस्या से बीमारियों का प्रकोप परेशान कर रहा था, तो जनप्रतिनिधियों के कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रहा था। रोज रोज अच्छे दिन आने के वादें आम जनता सुन सुन कर थक गई हैं।

कुछ समयों से पानी के लिए तरसती जनता धीरे धीरे आक्रामक रुख अपना रही थी। पंचायत सचिव, मुखिया, जिला परिषद, प्रखंड विकास पदाधिकारी तक शिकायत करते करते लोग थक चुके थे। फेसबुक पर भी एक आंदोलनत्मक रूप से अभियान चलाया जा रहा था। गाँव में बहुत मुश्किल से चार समरसेवल मोटर कुछ लोग गड़वाये हुए थे, जहाँ से पानी ढ़ोकर गाँव के लोग ले जाते थे। वार्ड सदस्य किसी भी प्रकार से कुछ कदम गड्ढ़े करवाकर पाईप लाईन 5 % क्षेत्र में करवाकर टाल मटोल कर रहे थे। जिसका आक्रोश बढ़ा और चुनाव के ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने एकता का परिचय देते हुए, लिखित आवेदन के साथ ग्रामीण पत्रकार मनीष कुमार ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को यह अवगत कराया कि अगर जल की समस्या का सामाधान नहीं किया गया तो मतदान कराने की हिम्मत गाँव में ना किया जाए। वहीं एक कदम बढ़ाते हुए, प्रखंड विकास पदाधिकारी ने जल नल योजना के इंजीनियर को पटिल्ही गाँव वार्ड संख्या 8 में स्थिति का जायजा लेने भेजा। इंजीनियर महोदय स्थिति का जायजा लेने पिछले छह-आठ महीने में कभी नहींं गये, जिसका परिणाम आज भयावह हो गई। इंजीनियर महोदय गाँव का दौड़ा करने की जगह वार्ड सदस्य के साथ गुफ्तगू कर भागने के चक्कर में थे। एक कागजी लापरवाही बरतने की तैयारी में, ताकि जाँच को टाला जा सके। वहीं मौके पर ग्रामीणों की नज़र इंजीनियर महोदय की गाड़ियों पर पड़ी और ग्रामीण बातें करने गये तो इंजीनियर महोदय अपना रौब दिखाने लगे और मतदान बाद इसपर विचार करेंगे कहकर लोगों को गुमराह करने लगे। वहीं नवयुवकों की एक टोली आकर इंजीनियर महोदय को सम्मान पूर्वक बैठा कर नज़रबंद कर दिया। जिसके बाद पुरे गाँव के लगभग 500 लोगों द्वारा इंजीनियर महोदय को घेरकर, वरिय पदाधिकारियों को बुलाने के लिए कहाँ। लेकिन प्रशासन की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि प्रखंड विकास पदाधिकारी या जिलाधिकारी जैसे पदाधिकारी गाँव तक आ सके। इसलिए पुलिस की सहायता से एक गुमराह करने वाले दस्तावेज तैयार कराये गये, जिसका शायद कोई औचित्य नहीं होगा।

अब ग्रामीण का कहना हुआ कि वोट का बहिष्कार सुनिश्चित था फिर भी देश के लिए मतदान किया। अब जब इतना समय बीत गया और जिला प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रहा हैं तो और इस सप्ताह में गाँव के प्रत्येक घर में जल नहीं पहुँचता हैं, तो पुलिस की चालबाजी का जबाव दिया जाऐगा। गर्मी और मौसम के प्रकोप के कारण पानी पीने लायक नहीं आ रही हैं। पानी की भारी कमी से जनता तबाह और परेशान हैं, लेकिन सांसद, विधायक जनता को गुमराह करने में लगे हुए हैं। इसका जबाव पूर्ण समझदारी के साथ अहिंसात्मक या जरूरत पड़ेगी तो अहिंसात्मक तरीकों से भी दिया जाएगा। हाजीपुर विधायक तो किसी सांसद के नौकर के रूप में एक रबड़ स्टांप के रूप में कार्यरत हैं। हाजीपुर विधायक अवधेश सिंह जो कागज पर मात्र विधायक हैं खानापूर्ति के लिए 29 मई 2019 की सुबह बिना गाँव वालों की सूचना के 5 मिनट में फोटो खिचवाते हुए भाग निकले। हाजीपुर विधायक अवधेश सिंह को भलीभाँति संदेश मिल गया था कि पटिल्ही में उनका स्वागत लाठी डंडे से किया जाएगा। इसलिए खानापूर्ति करना मजबूरी थी तो 5 मिनट एक दो दलालों को लेकर वार्ड सदस्य के पास पहुँचकर फोटों फेसबुक पर पोस्ट करना मोदी सरकार ने जरूरी कर रखा है चाहे काम हो ना हो आप जनता कघ समस्या देखें, दुनिया को बताईए। एक विधायक जो खुद गुलाम हो, जो विधायक की कुर्सी को भीख में मिला पाता हो, वह जनता की भावनाओं को क्या समझेगा। फिर भी अवधेश सिंह की हिम्मत तो हैं कि मालिक का लात खाने से बढ़िया जनता को ही गुमराह कर भाग निकलों। संदेश तो फेसबुक के माध्यम से चला ही जाएगा कि हम गाँव आये थे, ताकि अन्य का समर्थन मिले कि विधायक समस्या सुनने गया तो, लेकिन अब तक किसी ने नहीं पुछा समस्या का सामाधान हो गया या तुम्हारे जीते जी जनता को पानी मिल जाएगा।

खैर, बहुत सारे दबाव और अन्य जगहों से मिलने वाली शिकायतों के मद्देनजर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ध्यान चुनाव के बाद गया और ताबड़तोड़ निर्माण में लगे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि आज तक जो भी आवेदन आम जनता की ओर से जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को मिला वह कहाँ हैं। आवेदन के आधार पर काम चोरी, आम जनता के सरकारी धन की लूट, जनता को लगातार गुमराह करने वाले पर कार्यवाही की उम्मीद रखा जा सकता हैं। मोटी मोटी कमाई करने वाले सरकारी नौकर और जनता के नौकर जनप्रतिनिधियों को सैलरी मुक्त क्यों नहीं किया गया। क्यों नहीं आवेदन के आधार पर कमियों की जाँच कर नौकरियों से निलंबित क्यों नहीं किया गया। क्यों नहीं सबों की सुविधाओं के साथ साथ पानी, बिजली, भोजन में 70% की कटौती क्यों नहीं की गई। अब सरकार की नीयत को समझते देर नहीं लगती हैं, चोर चोर मौसेरा भाई हैं। सब मिलकर, बाँटकर खा रहे हैं और जनता व्यक्तिवादी सरकार के भरोसे अच्छे दिन के इंतजार में दुबारा सत्ताभोगी सरकार का गठन करवा डाली। तो स्पष्ट हो गया है कि आम जनता को वक्त पर फैसला करने नहीं दिया गया और राष्ट्रवाद के नाम पर मोदी सरकार लूट मचा गई। और जनता को प्राप्त हुआ पानी नहीं है, पानी नहीं है, पानी नहीं है का नारा।

08-Jun-2019 12:19

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