04-Oct-2019 11:00

पप्पू ना होता तो नरेंद्र मोदी और सुशील मोदी का क्या होता ?

वाकई समय आ गया है इस बात को समझने के लिए यह देश में राहुल गांधी अगर पप्पू ना होता तो नरेंद्र मोदी का क्या होता। उसी तरीके से अगर बिहार में पप्पू यादव ना होता तो सुशील मोदी का क्या होगा होता। 

जब भी चुनाव आता है, तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक हो जाते हैं और राहुल गांधी पर अपने कटाक्ष में अब उसे पप्पू ही बना दिया। और उसी के सहारे अपनी नैया पार करने में लगे रहते हैं। और उसी नैया को पार करते-करते वह दोबारा प्रधानमंत्री तक बन गए। राहुल गांधी तो पप्पू है या किसी और ने नहीं भारत के प्रधानमंत्री ने अपने ही देश के एक युवा के लिए यह शब्द दिया और अपने भक्तों के माध्यम से पूरे देश में अपने देश के एक युवक को पप्पू बना दिया। चलो खैर यह भी ठीक है । लेकिन अब सवाल उठता है कि पप्पू के सहारे प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी पटना को जलमग्न कर छोड़ दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या जवाब दे सकते हैं कि आज जो पटना की स्थिति हुई उसके लिए जिम्मेदार कौन है ? आप बड़े बड़े वादे दावे सब कुछ राष्ट्रभक्ति के नाम पर करा लेते हैं । यहां तक कि आपने वोट की ठगी हुई, राष्ट्रभक्ति के नाम पर किया। लेकिन आज पटना वासियों को यह महसूस होता होगा कि जिस नरेंद्र मोदी ने स्मार्ट सिटी का सपना दिखाया क्या हुआ है। स्मार्ट सिटी है, पानी के बीच में तैरती हुई। शहरों को देखकर होगा क्या ? यही स्मार्ट सिटी नरेंद्र मोदी के सपनों का है ? जिसमें नालों के पानी उसे पूरा शहर जलमग्न हो गया। पटना सिटी में या पटना शहर कहा जाए तो मोटा मोटी पांच फिर से 15 फीट तक पानी का जल जमाव हो गया। पूरा का पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटी का हाल यह रहा दूध पीते बच्चे तक को पानी दूध के लिए तरसना पड़ा लाखों लोग पानी के कारण एक वक्त की रोटी तक के लिए बिलखते हुए नजर आए। मैं मोदी जी आपके स्मार्ट सिटी की ही देन है कि पूरा स्मार्ट सिटी पटना नालों के जलवों से जनसैलाब लेकर आई और लाखों जिंदगियों को तबाह करके चली गई। आज भी सत्य है कि कई जगह पर पानी लगी हुई है। और वह गरीब जो झुग्गी झोपड़ियों में रहकर कैसे भी जीवन यापन पटना के अंदर कर रहा था। वह आज खुले आसमान में रहने के लायक भी ना बचा और आपके 39 नरेंद्र मोदी आज बिहार से लापता है। उनकी खोज आपको करनी चाहिए क्या ? बिहार की जनता ने आपको इसीलिए इतनी बड़ी मैंडेट दिया था, कि आप उन्हें नाले की पानियों में डूबे डुबोकर मारे ? कैसे गैर जिम्मेवार 39 नरेंद्र मोदी की खोज आपने बिहार में की यानी आप का चरित्र उन ही उन 39 नरेंद्र मोदीओं में देखा जा सकता है ? तो अस्पष्ट हो गया है के स्मार्ट सिटी जैसे प्रथम मोदी है, उसी तरीके से 39 नरेंद्र मोदी को देखकर अपनी जुबान पर ताला लगाकर पानी में, आग में, धूप, बरसात में अब रहें। हम तो झूठ और जुमलेबाजी ही करेंगे । अब हम बात करते हैं बिहार में छोटे मोदी से प्रचलित सुशील मोदी की । यह वही सुशील मोदी हैं जो 14 साल पहले पटना शहर में बरसात के पानी आए हुए के खिलाफ धरना पर बैठे और आमरण अनशन तक किए। जिसके बावजूद 2005 से बतौर बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं । और कितनी अच्छी जिम्मेवारी निभाए हैं, वह आज पूरा भारत ही नहीं, पूरे विश्व देख रहा है। छोटे मोदी बड़े मोदी से कम तो नजर नहीं आते हैं। झूठ बोले, जुमलेबाजी करने में यह बड़ा दुर्भाग्य है कि बिहार के उपमुख्यमंत्री को भी रेस्क्यू कर पटना के नालियों के बीच से निकाला गया। सुशील मोदी हाफ पेंट में नजर आए। पूरे परिवार के साथ सड़कों पर खड़े रहे। और ताज्जुब की बात तो यह है कि बिहार पुलिस के लोग एक वैसे उपमुख्यमंत्री के लिए भागम भाग कर रहे थे। जो निकम्मा है, कामचोर है । जिसे अपने पद की गरिमा और प्रतिष्ठा रखने में भी अपनी भूमिका या अपना योगदान देना उचित ना समझता। एक ऐसा उपमुख्यमंत्री जो सिर्फ राजनीति के गलियारों में इसलिए बैठा हुआ है, उसे सत्ता में और सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठना है।

अब बात करते हैं कि अगर पप्पू यादव ना होता तो क्या होता पटना का। बिहार सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो काम कर रही है। वह अपने सरकारी अफसरों पर तो आगे बढ़ी रहे हैं, लेकिन जो पदाधिकारी अधिकारी या जो राजनेता आज यह कहते हैं कि नीतीश कुमार की सरकार विफल है। तो उनके साथ जो एनडीए की सरकार है, एनडीए गठबंधन में है जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे भारत में काम कर रही है, उनके ऊपर क्यों नहीं उंगली उठाई जाती ? वाकई पप्पू यादव ने सराहनीय काम किया और एक जनप्रतिनिधि होने का सही कर्तव्य निभाया ? इस दुख की घड़ी में जितने ही परिवारों तक पप्पू यादव पहुंचे, वह काबिले तारीफ है । पप्पू यादव की भूमिका को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि बिहार की राजनीति में और बिहार के नेतृत्व में अभी भी बहुत जगह खाली है और वर्तमान परिस्थिति में ऐसा कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं दिखता है, जिसके भरोसे पर बिहार आगे बढ़ सकता है। खैर पप्पू यादव ने वर्तमान परिस्थिति में एक अहम भूमिका निभाकर राजनीतिक गलियारों में अपनी एक अलग पहचान बनाने का जो प्रयास किया। वह बनकर तैयार भी हो गया है। आगे देखते हैं कि पप्पू यादव यही सक्रियता बनी रहती है या कुछ और नजर आएगी। आगे फिर भी पप्पू यादव को एक भावनात्मक रूप से मदद के रूप में समस्तीपुर में झकझोर दिया।

यह घटना कुछ इस प्रकार है " भावनात्मक पहल एक छोटी बच्ची द्वारा " " श्रेया समस्तीपुर से आकर पूर्व सांसद पप्पू यादव से मिलती है , अपना गुल्लक तोड़ ₹ 11,000 पप्पू यादव के हाथों में देती है बाढ़ पीड़ित को भोजन , पानी के लिऐ सहयोग स्वरूप ...शब्द नहीं है श्रेया के इस भावनात्मक पहल के लिए। पप्पू यादव ने श्रेया के विशाल हृदय को देखते हुए कहा कि" आज़ किसी सेलिब्रिटी , क्रिकेटर , दूसरे राज्यों के नेताओं या अन्य किसी द्वारा बिहार को बाढ़ रिलीफ फंड के नाम पर ₹ 1 देते हुऐ ..सिर्फ़ बिहारी ने बिहारी क़ी मदद क़ी ..चाहे वो श्रेया हो नेता , अभिनेता याद रखिएगा ये बात ?

04-Oct-2019 11:00

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