27-Dec-2019 02:57

झारखंड की सबसे कम उम्र की विधायक

अंबा ने कभी साेचा भी न था कि वे विधायक बनेंगी, लेकिन माता- पिता के जेल जाने और राज्य बदर होने के बाद उन्हाेंने शपथ ली थी कि बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में माता -पिता के अधूरे कार्यों को वे पूरा करेंगी।

बड़कागांव से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल कर इतिहास रचनेवाली अंबा प्रसाद ने पिता योगेंद्र साव और मां निर्मला देवी के आंदोलन को न सिर्फ जिंदा रखा, बल्कि उनकी राजनीतिक विरासत को भी बचाए रखने में कामयाब हुईं।

अंबा ने कभी साेचा भी न था कि वे विधायक बनेंगी, लेकिन माता- पिता के जेल जाने और राज्य बदर होने के बाद उन्हाेंने शपथ ली थी कि बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में माता -पिता के अधूरे कार्यों को वे पूरा करेंगी।

पिछले चार वर्षाें से वे क्षेत्र में सक्रिय रहीं। कार्मेल स्कूल से पढ़ाई करने के बाद 12वीं की पढ़ाई डीएवी स्कूल, हजारीबाग से पूरी की। 2009-12 में विभावि से एलएलबी की डिग्री हासिल करने के बाद संत जेवियर्स कॉलेज, रांची से 2012-14 में पीजीडीएम (एचआर) की डिग्री हासिल की।

उसके बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। इसी क्रम में कफन सत्याग्रह के दौरान माता निर्मला देवी और पिता योगेंद्र साव को जेल भेज दिया गया, ताे अंबा प्रसाद दिल्ली की पढ़ाई छोड़कर हजारीबाग लौट आई। फिर हजारीबाग कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू किया और माता -पिता पर दर्ज मुकदमों को उन्होंने देखना शुरू कर दिया।

27-Dec-2019 02:57

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