02-Aug-2019 03:15

जनतंत्र में जनता ही मालिक प्रोफ़ेसर बीके सिंह

दरौंदा विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर ताल ठोकने की तैयारी में लगे ख्याति प्राप्त शिक्षक प्रो बी के सिंह

सिवान जिले के दरौंदा विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर ताल ठोकने की तैयारी में लगे ख्याति प्राप्त शिक्षक प्रो बी के सिंह से वरिष्ठ पत्रकार अनूप नारायण सिंह की खास बातचीत प्रश्न 1: आप शिक्षक हैं, फिर पढ़ाना छोड़कर राजनीति में क्यों जाना चाहते हैं? उत्तर: क्षमा करेंगे महोदय, अगर सच पूछा जाए तो हम शिक्षकों को ही राजनीति में आना चाहिए। हमारे नहीं आने का ही परिणाम है की आज राजनीति का स्तर इतना नीचे गिर गया है और सर्वत्र घोटाले और भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। प्रश्न 2: क्या शिक्षक भ्रष्टाचारी नहीं होते? उत्तर: होते हैं हुज़ूर, यह मैं कैसे कह दूं कि नहीं होते हैं। किंतु हां, एक शिक्षक की मुहर लग जाने मात्र से ही उनपर अन्य की अपेक्षा थोड़ा लोक लाज का डर अधिक बना रहता है। इसलिए वे कुछ गलत भी करते हैं तो एक सीमा के भीतर। प्रश्न 3: जब आप राजद में थे उस समय आपको पता नहीं था कि लालू जी भ्रस्टाचार में लिप्त हैं? उत्तर: पता था किंतु आरोप सिद्ध नहीं हुआ था और जब तक किसी पर आरोप तय नहीं हो जाता अथवा जब तक कोई सजायाफ्ता करार नहीं किया जाता तब तक हम उसे एक भ्रष्टाचारी कैसे कह सकते हैं।

प्रश्न 4: उसके बाद भी तो उनको 2015 में जदयू से अधिक 80 सीट आयी? उत्तर: इसलिए की वे चन्दन के वृक्ष से लिपटे हुए थे जिसकी छवि जनता के बीच एक साफ सुथरे नेता के रूप में थी तथा जो सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध था। वह कोई और नहीं माननीय महोदय, आप स्वयं हैं। प्रश्न 5: आप जीतकर क्षेत्र के लिए क्या करना चाहेंगे? उत्तर: व्यक्तिगत स्तर पर क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं सम्भावनाओं से पार्टी आला कमान को अवगत कराउँगा तथा पार्टी स्तर पर पार्टी के नीतियों एवं कार्यक्रमों को जमीन पर उतार उसे सफल बनाने का प्रयास करूंगा। प्रश्न 6: आपका अपना कोई क्षेत्रोद्धार का दृष्टिकोण या सुझाव? उत्तर: क्षेत्र को जल जमाव से मुक्त कर भूमि को कृषि योग्य बनाना, प्रत्येक गांव में सामूहिक डेरी फार्म की स्थापना एवं अन्य कृषि आधारित उद्योग-धंधों का विकास करना, आदि। प्रश्न 7: आप स्वयं एक शिक्षक हैं, कोई शैक्षणिक उपक्रम की स्थापना सम्बन्धी विचार? उत्तर: बिल्कुल है महोदय। एक कृषि महाविद्यालय की स्थापना का सुझाव होगा मेरा। लगभग पूरा उत्तर बिहार इस कमी का दंश झेल रहा है। कृषि विकास से सम्बंधित कोई भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी इस पूरे उत्तर बिहार में नहीं है। इसकी स्थापना मेरी प्राथमिकता होगी।

प्रश्न: राजद छोड़ने का आपका कोई ठोस कारण? उत्तर: इसके कई कारण हैं और प्रत्येक कारण अपने आप में एक ठोस कारण है। यथा; 1. मूल रूप से एक शिक्षक हूँ इस नाते मेरी मेंटालिटी बहुत हद तक राजद की कार्य संस्कृति से कभी मेल नहीं खाई, 2. राजद की कोई ठोस आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक नीति नहीं है। 3. निम्न स्तर पर समाज को तोड़कर राज करना इनकी फितरत रही है।

4. ग्रामीण स्तर पर ऊंच-नीच, अगड़ी-पिछड़ी जातियों के बीच बैमनस्य की भावना काफी हद तक समाप्त हो गई है खासकर जदयू के शासनकाल में, किन्तु, राजद के कार्यकर्ताओं द्वारा आज भी इस बैमनस्य को दूर करने में सहायता करने के बजाय आग में घी डालने का काम किया जाता है, जो मेरे टेम्परामेंट के बिल्कुल भिन्न है। 5. राँची के जेल में सजा काट रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की लोक सभा की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। चुनाव के नए नियमों के अनुसार अब वे 11 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इस बावत लोकसभा से जारी अधिसूचना के मुताबिक लालू प्रसाद यादव संसद की सदस्यता गँवानेवाले भारतीय इतिहास में पहला सांसद हो गए हैं। अब ऐसी स्थिति में जिस पार्टी का सर्वे सर्वा ही भ्रष्टाचार के मामले में सजयाफ्त हो उसका भविष्य कैसा होगा उसकी कल्पना मात्र से ही बदन सिहर जाता है। इन्हीं सब कारणों से मैंने इस पार्टी को अलविदा करने का मजबूत मन बना लिया है।

02-Aug-2019 03:15

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