27-Apr-2018 09:51

गटर में तब्दील हाजीपुर नगर परिषद

नहीं संभल पा रही नगर परिषद से हाजीपुर शहर का सामाजिक आर्थिक मानसिक एवं कानूनी व्यवस्था

हाजीपुर शहर एक ऐतिहासिक धरोहर है और यह धरोहर ही नहीं एक अपने आप में संस्कृत है, संस्कृति है, सभ्यता है, परंपरा है, व्यक्तित्व निर्माण है, मानवता वादी सोच है, और एक सुंदर सा स्पष्ट समाज। लेकिन आज राजनीति की ऐतिहासिक परिपार्टी चल पड़ी है। जिसमें झूठ, बेईमानी, अपराध, घोटाले, आदि। जो बढ़ता वर्चस्व है उससे हाजीपुर की छवि पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। आज हाजीपुर नगर परिषद पिछले कई सालों में लंबी राजनीति का शिकार हुआ है। जिसका परिणाम पिछले एक दशक में हाजीपुर की जनता ने देखा है। राजनेताओं को अपनी अपनी राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करने का एक अखाड़ा के रूप में भी नगर परिषद को देखा जाता रहा है। और आखिर क्यों ना हो ? हाजीपुर शहर वैशाली जिले का एक महत्वपूर्ण शहर है । जिसमें रुपए का खेल है वह ऐसा खेल है जिसे आम आदमी को मानवता से दूर कर देती है। खास लोगों को आम लोगों से दूर करती हैं। कहने को राजनीति नाम मात्र की है। लेकिन हाजीपुर शहर में एक आदमी के इर्द-गिर्द पूरे हाजीपुर नगर पालिका एवं हाजीपुर शहर का हर कोना घूमता है। और यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि हाजीपुर शहर में एकल व्यक्ति का व्यवस्था बहुत ही घातक होता जा रहा है। किसी न किसी परिपाटी के अधीन एक पार्टी , एक व्यक्ति, मुखोटे पहनकर बैठे हुए हैं। जिसका दुर्भाग्य है कि हाजीपुर का विकास पिछले दो दशकों से निरंतर गर्त की तरफ बढ़ रही हैं। और यह दुर्भाग्य आने वाले हाजीपुर के लिए और भी दुर्भाग्यपूर्ण बनाएगी । आज हाजीपुर शहर में ना तो सही से बिजली का संचालन होता है , ना सही तरीके से गाड़ी का आवागमन। लेकिन आप देख सकते हैं हाजीपुर शहर के सड़कों पर अतिक्रमण इतनी बड़ी विरासत बसाई गई। जिसमें हाजीपुर शहर का एक ऐतिहासिक धरोहर होते हुए भी धरोहर ही नहीं एक अपने आप में संस्कृति है, सभ्यता है, परंपरा है, विकसित निर्माण है , मानवता वादी स्वच्छ और एक सुंदर सा स्पष्ट सा समाज। लंबी राजनीति का शिकार हुआ है, जिसका परिणाम यह है कि हाजीपुर शहर सड़कों पर चलना मुश्किल है। दुकान सड़कों पर बसाई गई हैं। जिसमें ₹10 वसूली के रूप में हर सुबह शाम लिया जाता है और इसकी वसूली करने वाले कुछ चंद तरीके के लोग हैं । जिसमें नगर परिषद अपनी अलग टीम बनाकर के काम करती है । वही जिला प्रशासन अलग काम कराती है। पैसे वसूली में वही सबसे बड़ा माध्यम पुलिस प्रशासन भी है। आप शहर के प्रमुख रास्तों पर देख ले । जैसे की गुजरी रोड राजेंद्र चौक सुबह 6:00 बजे से पैसे वसूली करने के लिए दो तीन पुलिसवाले खाकी वर्दी में खड़े होते हैं। वहीं दूसरी रोड कचहरी रोड, सिनेमा रोड के सभी जगह पर आप पूरे दिन में देख सकते हैं। रिक्शा वालों से कोई न कोई पैसा लेने में लगा हैं। आम आदमी जो अपना पेट फल बेचकर भरता हैं। कोई फल व्यापारीयों से फल लेकर जाता है तो कोई समोसे खाते हुए नजर आते हैं। यहाँ के ना विधायक सक्रिय हैं ना ही नगर परिषद के सभापति, उपसभापति। वहीं सांसद को चिंता ही नहीं है। हम किस पर भरोसा करें यह आज भी एक सवाल बने खड़ा है। वही गुदरी रोड में सोनी अलंकार कम्प्लेक्स के सामने सदियों से गटर बना पड़ा हुआ है। कचरों की ढेर में बीमारियों को बड़े स्तर पर आमंत्रित किया है। वहीं जोहरी बाजार क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर लगातार कचरे जमा किए जाते रहे हैं। जिसके बावजूद उसके देख रेख की जिम्मेवारी बहुत हद तक आम आदमी को समझाने का प्रयास करने की हद तक जिला नगर परिषद द्वारा कुछ प्रयास किया गया। लेकिन दुर्भाग्य है कि काम करने में लगातार हमारी सरकारें विफल रही। जनप्रतिनिधियों को झूठ बोलने की ऐसी लत पड़ चुकी है कि भारत के सर्वोच्च पद पर बैठे हुए जनप्रतिनिधि भी झूठ के सहारे ही अपनी रोटी सेक रहे हैं। और इन्हीं के पार्टियों के द्वारा आज हाजीपुर शहर का संचालन किया जाता है और दुर्भाग्य है उसकी गरिमा भी आम आदमी के चुप रहने से बढ़ रही है। समय आ गया है कि आम आदमी जागे और अपने वार्ड सदस्यों, विधायक को, पार्षदों एवं सांसदों के साथ सीधी संवाद का जरिया तय करें। जिसके माध्यम से जिला प्रशासन सक्रिय हो एवं कार्यपालक पदाधिकारी। पदाधिकारीयों को सही ताकत देकर ही सक्रिय होकर के हाजीपुर शहर को एक मॉडल शहर के रूप में पदस्थापित किया जा सकता हैं। वहीं ना तो किसी जिला प्रशासन की इच्छा शक्ति में मजबूती दिखती है और ना ही किसी राजनेताओं के इच्छाशक्ति में कोई बल है। अपना अपना रोटी सेकने में लगातार निरंतर प्रयास करते रहते हैं। लेकिन हाजीपुर की दुर्दशा के लिए कोई जिम्मेवार है तो वह हाजीपुर की आम जनता है। वह आम जनता जिसने अपना वोट ऐसे लोगों को दिया जिन्हें हाजीपुर के विकास से कोई मतलब नहीं है। इसलिए हमें आगे आना होगा और बेहतर समाज की परिकल्पना के लिए बेहतर हाजीपुर के लिए, अपने जीवन का एक सुनहरा पल देना होगा। ताकि हाजीपुर एक सुनहरे सफर की तरफ बढ़ सके। वहीं कई सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी अपनी आवाजें बुलंद करने का प्रयास किया हैं। लेकिन आज आंदोलन या आवाज को दबाने में ही जिला प्रशासन को लगाया गया है। ताकि झूठ और झूठे मुकदमे दर्ज कर लोगों की आवाज़ न्यायालय की तरफ मोड़ दी जाए। इससे भी बच कर चलने की आवश्यकता है।

27-Apr-2018 09:51

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