23-Dec-2019 11:11

खासमहाल वासियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लगाई गुहार, कहा – सरकार मूलभूत अधिकारों से ना करें वंच

खासमहाल नीति 2011 के 5 अध्याय हैं जो क्रूर नियमों से अभिशप्त हैं एवं पुराने लीज के मूल भावनाओं से भिन्न है चाहे वह लीज नवीकरण की नीति हो पूर्व अनुमति की नीति हो लीज के शर्तों के उल्लंघन की नीति हो या अन्य विविध नीतियां।

पटना, 22 दिसंबर 2019 : बिहार सरकार की खासमहाल नीति 2011 के अनुसार, स्‍थानीय बाशिंदों को उनके घर से बेघर करने के खिलाफ आज खासमहाल सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से राजधानी पटना के कदमकुआं स्थित सेंट सेवरेंस स्‍कूल में एक आपात बैठक सह संवाददाता सम्‍मेलन का आयोजन किया है। इस दौरान खासमहाल निवासियों ने बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से खासमहाल नीति 2011 को निरस्‍त करने की मांग की और कहा कि वे उन्‍हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित न करें।

संवाददाता सम्‍मेलन में वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव शैलेंद्र नाथ सिन्हा और उपाध्‍यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि सरकार और प्रशासन के द्वारा विगत कई दिनों से खासमहाल वासियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन खासमहाल बाशिंदों के ऊपर एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनको घर से बेघर करने का काम कर रही है। इसलिए सोसायटी के सारे सदस्यों ने मिलकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए घर कब्जा करने के आदेश आदेश को तुरंत निरस्त करने का अनुग्रह किया है। साथ ही प्रशासन से मांग किया है कि नगर निगम के तर्ज पर अविलंब खासमहल वासियों का म्यूटेशन एवं किराया लेना स्वीकार करें तथा पूर्ण पुराने सर्विस निरस्त कर सरकार हमारे जमीन को पीआरडीए और हाउसिंग बोर्ड की जमीन की तरफ फ्री होल्ड करें।

उन्‍होंने कहा है कि हम इस राज्य के अनुशासित और सभ्य समाज के निवासी हैं। सरकार हमें हमारे मूलभूत अधिकारों से वंचित ना करें। इस शहर को बसाने में हमारे पूर्वजों का अहम योगदान रहा है। खासमहाल नीति 2011 से खासमहल निवासियों को होने वाली मुश्किल, लाचारी और बेबसी का कोई ख्याल नहीं है। उन्‍होंने खासमहाल स्‍थायी और जमीन की बंदोबस्‍ती की प्रक्रिया को विस्‍तारे से समझाया और कहा कि अंग्रेजी सरकार लीजधारी भारतीयों को गुलाम समझती थी इसलिए पैसे लेकर भी लोगों को जमीन का मालिक बनाने के बजाय लेसी ही बनाया। उन्‍होंने कहा कि सरासर नाइंसाफी है खुद ही निष्कासन का सूचना देना और खुद ही निष्पादन करना तर्कसंगत नहीं है। नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन है या व्यवहार न्यायालय की अवहेलना करने की एक साजिश है।

उन्‍होंने कहा कि‍ खासमहाल नीति 2011 के 5 अध्याय हैं जो क्रूर नियमों से अभिशप्त हैं एवं पुराने लीज के मूल भावनाओं से भिन्न है चाहे वह लीज नवीकरण की नीति हो पूर्व अनुमति की नीति हो लीज के शर्तों के उल्लंघन की नीति हो या अन्य विविध नीतियां। ज्ञात हो कि माननीय उच्च न्यायालय एवं सुप्रीम कोर्ट ने खासमहाल 2011 के नीति 7 बटा 4 बटा 2011 से पहले के लीज होल्ड धारकों पर लागू नहीं करने का आदेश दिया है। फिर भी प्रशासन द्वारा मालगुजारी नहीं लेना म्यूटेशन नहीं करना पुराने ली धारियों को गलत सर्वे रिपोर्ट का आधार बनाकर पुलिस के द्वारा मकान खाली करवा रही है, जो सरकार जो सरासर कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करना है। उन्‍होंने खासमहाल सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी के सारे सदस्यों से सरकार से गुहार लगाते हैं कि सरकार प्रशासन के द्वारा घर कब्जा करने के आदेश को तुरंत बंद कराएं और प्रशासन को यह आदेश दें कि नगर निगम के तर्ज पर अविलंब खासमहाल के वासियों का म्यूटेशन एवं किराया लेने स्वीकार करें और पुराने सर्वे को निरस्त कर सरकार हमारे जमीन को भी पीआरडीए हाउसिंग बोर्ड की जमीन की तरफ फ्री होल्ड करें।

23-Dec-2019 11:11

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