22-Dec-2019 12:00

केंद्र के काले कानून के खिलाफ वाम दलों व राजद के बिहार बंद को महागठबंधन का समर्थन

देश में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की खुदखुशी, बलात्कार और अपराध में बेतहाशा इजाफा हुआ है। अर्थ्यवस्था बदतर है, मंदी की मार से व्यवसायी परेशान हैं लेकिन केंद्र सरकार इस पर ध्यान की बजाय नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का मुद्दा उछाल कर लोगों का ध्यान भटका

पटना, 18 दिसंबर 2019,: केंद्र सरकार और भाजपा नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के जरिये देश को बांट कर सियासत करने में लगी है। नागरिकता संशोधन कानून संविधान विरोधी है और केंद्र सरकार इसे देशवासियों पर जबरन थोप कर देश को अस्थिर बना रही है, ताकि इस पर वह अपनी सियासी रोटियाँ सेंक सके। महागठबंधन का मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का मुद्दा उठा कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार मूल मुद्दों से ध्यान भटकना चाहती है। देश में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की खुदखुशी, बलात्कार और अपराध में बेतहाशा इजाफा हुआ है। अर्थ्यवस्था बदतर है, मंदी की मार से व्यवसायी परेशान हैं लेकिन केंद्र सरकार इस पर ध्यान की बजाय नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का मुद्दा उछाल कर लोगों का ध्यान भटकाने में लगी है। महागठबंधन का मानना है कि नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए की सरकार संविधान बदलने की साजिश में लगी है।

हैरत इस बात की है कि खुद को सामाजिक न्याय का चैंपियन कहने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इसका समर्थन कर अपनी नीयत को जग जाहिर कर डाला। धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देने वाले नीतीश कुमार संसद के दोनों सदनों में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन कर न सिर्फ बिहार के आवाम के जनादेश का फिर से अपमान किया बल्कि अपना फासिस्ट चेहरा भी उजागर कर डाला। नीतीश कुमार अब एनआरसी लागू नहीं करने की बात कह कर बिहार के आवाम और खास कर मुसलमानों को फिर से बरगलाने में लगे हैं।

लेकिन एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक पर उनका रुख तो संसद में सामने आ गया था। महागठबंधन का मानना है कि देश को केंद्र की एनडीए सरकार ने आराजकता की तरफ ढकेल दिया है और नीतीश कुमार उसका साथ दे रहे हैं। केंद्र सरकार की मंशा को इसी से समझा जा सकता है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड की सभा में कहते हैं कि हिंसा के कीचड़ में ही कमल खिलेगा। महागठबंधन इस बयान पर कडा एतराज जताता है और इन बयानों के बाद नीतीश कुमार की चुप्पी पर भी सवाल उठता है। महागठबंधन लंबे समय से कहता आ रहा है कि भाजपा और आरआरएस देश का संविधान बदलने में लगे हैं और नीतीश कुमार परदे के पीछे उनका साथ दे रहे हैं। महागठबंधन इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता है। जामिया मील्लिया से लेकर पटना तक इस काले कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छत्र- छात्राओं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस ने लठियाँ बरसाई, हम उसकी भी कड़े शब्दों मे निंदा करते हैं।

देश में भाजपा द्वारा अराजक माहौल पैदा करने की कोशिश की जाने, नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ वाम पार्टी ने 19 दिसंबर और राजद ने 21 दिसंबर को बिहार बंद का एलान किया है। महागठबंधन में शामिल कांग्रेस,रलोसपा, वीआईपी और हम इस बंद का सक्रिय समर्थन करते हैं। राजद और वाम दलों के एक ही मुद्दा पर अलग अलग बंद बुलाये जाने को एक ही दिन करने की कोशिश की गई थी, लेकिन इसमें हम सफल नहीं हो सके। अतएव विपक्षी एकता को बनाए रखने के मकसद से महागठबंधन ने दोनों बंद को समर्थन देने का फैसला किया है। साथ ही 21 दिसंबर को राजद के बंद की पूर्व संध्या (यानी 20 दिसंबर को) बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर महागठबंधन मशाल जलूस भी निकलेगा।

22-Dec-2019 12:00

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