24-Dec-2018 12:54

आशा से अधिक पा गोवा उड़ान भरें राजनीतिक मौसम वैज्ञानिक : सूत्र

राजनीति की नब्ज पकड़ने में माहिर रामविलास पासवान फिर चकमा दे निकल पड़े नौका विहार करने।

पिछले 50 सालों से दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले भारत के राजनीतिक मौसम वैज्ञानिक रामविलास पासवान ने फिर बाजी मारी। उपेन्द्र कुशवाहा को बढ़ा चढ़ाकर NDA से बाहर निकालकर उनके सीट पर कब्जा ही नहीं किया, बल्कि अपने जीवन की अंतिम लड़ाई से डर कर पिछली गली पकड़कर सदन में पहुँचने का भी रास्ता प्रसस्त कर चले। सूत्रों की माने तो रामविलास पासवान को कुछ समय पहले उनके ही समुदाय व जातियों के लोगों द्वारा हाजीपुर में काला झंडा दिखाकर जातियों को धोखा देने का आरोप लगाया था। अपनी राजनीतिक सूझबूझ से ही हार के डर से चुनाव में ना उतर कर पिछवाड़े से सदन में बैठने का रास्ता साफ कर लिया। अब रामविलास पासवान यह समझ गये कि अब अपने जाति के साथ अपने दम पर धोखा नहीं दे सकते हैं। पिछले 42 सालों से हाजीपुर लोकसभा सीट पर कुंडी मार कर बैठे रामविलास पासवान ने समाज का विकास करने में कभी इच्छा नहीं दिखाई। जिससे दुखी होकर ही अपने ही लोगों द्वारा विरोध कर दिया गया और राजनीतिक मौसम वैज्ञानिक ने भी अपनी चाल बदल दिया और पिछली गली पकड़ लिया।

सर्वविदित है कि राजनीति का लाभ आम आदमी की पहुँँच से हमेशा दूर रही हैं। जो जिस पद पर बैठा वह वहीं से आम आदमी का श्वसन करना शुरू करते रहा है। जिस आशा और विश्वास के साथ रामविलास पासवान को दलित समाज का नेता बनाया गया वह कहीं भी जमीन पर नजर नहीं आती हैं। दलितों के मसीहा के नाम पर बड़े बड़े ब्राँडिग की गई थी। रामविलास पासवान का वह नारा कोई नहीं भूला हैं कि " हम उस घर में चिराग जलाने चले हैंं जहाँ सदियों से अंधेरा हैं"। लेकिन रामविलास पासवान ने खुद के घर में ही चिराग जलाया और अपने दलितों के घर से धुँधले दिये को भी बुझा दिया। रामविलास पासवान ने परिवार को सत्ता की भेंट चढ़ाकर परिवारिक संस्कारों को तिलांजली दे दी। सब जानते हैं कि रामविलास पासवान स्वार्थ सिद्धि के लिए अपनी पहली पत्नी और बच्चों को सड़क पर छोड़कर नई दुनिया बसा ली। जिसका परिणाम यह है कि जो अपने जीवन संगनी को सफलता के बाद छोड़ कर दो चार कदम आगे बढ़े वह समाज का कभी नहीं हो सकता। रामविलास पासवान का शायद किस्मत बड़ा महान हैं कि राजनीतिक दलों की वैज्ञानिक परख कर सकते हैं और जीवन के अंतिम समय में अब रिस्क नहीं लेगें। लेकिन समाज देख रहा है और उनकी दूसरी पत्नी से हुए पुत्र का राजनीतिक जीवन का अंत रामविलास पासवान के कर्मों के आधार पर ही लिखा जाएगा।

आगे बढ़ते हुए कहते हुए गुरेज नहीं है कि रामविलास पासवान फिर राजनीति के सफ़ल महारथी बनने का पहला कदम चल चुके हैं। आम चुनाव 2019 का शंखनाद होने को है और गठबंधन की पहली नींव रख कर सपरिवार मुंबई होते हुए गोवा में अंग्रेजी नये वर्ष की तैयारी में चले गये। जहाँ NDA में चार की जगह 6 सीट लेकर अपने पूरे परिवार को सेट कर दिये। जहाँ पूरे सीट का बाँटवारा NDA से भी कर निश्चित हुए वहीं 6 सीटों का 99% बाँटवारा भी कर लिये। SC/ST सीट पर जहाँ उन्होंने अपने परिवार को ही सेट कर दिया, वहीं बाकी सीटों पर भूमिहार, राजपूत और कुशवाहा को सेट कर दिया है। परिवार में दो भाई और एक पुत्र का राजनीतिक जीवन सुदृढ़ कर अपना पैत्रृक धर्म निभाया। वहीं अपने परिवारिक दायित्व को को दूसरी पत्नी के प्रति जिम्मेदारी भी कर जीवन का उद्देश्य पुरा कर संतुष्ट हैं।

सूत्रों के अनुसार 1 सीट राज्यसभा व 6 सीट लोकसभा का बाँटवारा करके ही मुंबई और गोवा भ्रमण करने निकले। सूत्र बताते हैं कि 1 सीट राज्यसभा की अपने हार के डर से पिछले दरबाजे सदन के लिए रखा हुआ हैं। वहीं लोकसभा सीट हाजीपुर आरक्षित भाई पशुपति कुमार पारस को हाजीपुर का उतराधिकारी अपना बनायेंगे। वहीं दूसरे आरक्षित जमुई सीट अपने एकलौते पुत्र और वर्तमान जमुई सांसद चिराग पासवान को दिया हैं। तीसरे आरक्षित सीट समस्तीपुर अपने एक और भाई राम चंद्र पासवान के लिए रख लिया हैं। अब आरक्षित सीटों की जरूरत भी नहीं थी तो चौथा वैशाली लोकसभा सीट वर्तमान सांसद रामाकिशोर सिंह से छिन कर गायघाट (मुजफ्फरपुर) विधायक वीणा सिंह (पति - दिनेश सिंह MLC- जिनका नाम मुजफ्फरपुर सबसे बड़े काण्ड में भी नाम आया है और अभी किलिनचिट नहीं मिला है), पाँचवाँ खगड़िया सीट उपेन्द्र कुशवाहा का कुशवाहा विकल्प अशोक सम्राट को दिया गया है और छठा सीट अगर गिरिराज सिंह वर्तमान सांसद नावादा मान गये तो नवादा नहीं तो बेगुसराय सीट से वीणा देवी (पति सूरज भान सिंह) को दिया गया है। इन सीटों के बाँटवारा करने में भी रामविलास पासवान ने मौसम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही का किया है। जहाँ SC/ST कानून से 100% भारतीयों को गुमराह और धोखा का काम किया, वहीं राजनीति की कोई जात नहीं होती और कोई संस्कार, सभ्यता, संस्कृति और परम्परा की जरूरत यह स्पष्ट हो गया।

24-Dec-2018 12:54

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