15-Apr-2020 10:56

6 सालों में 130 करोड़ लोगों तक पहुंचने का अब तक एक सिस्टम तैयार करने में मोदी विफल

नोटबंदी की तर्ज पर लॉक डाउन से लाखों-करोड़ों लोग तबाह, कितनों की मौत से परिवार में अशांति

नरेंद्र मोदी की विफलता इसी से जगजाहिर हो जाती है कि भाषणों के अलावा धरातल पर आम लोगों के बीच में अपनी भूमिका आज तक स्पष्ट नहीं कर पाए। जिस तरीकेे से नरेंद्र मोदी ने 7 सालों में अपनी राजनीतिक खड़ी की है, उस राजनीति का शिकार लगातार भारत की आम जनताा होती रहीी है। बड़े-बड़े फैसले, बहुत आसानी से लेने के अपनेे दावों के लिए मशहूर नरेंद्र मोदी आज भारत के प्रधानमंत्री हैं और एक और सफल नेतृत्वव के कारण भारत की आम आवाम को लगातार कतारों में खड़े रखना पसंद कर रहे हैं। पहले नोटबंदी से लोगों ने संभालने का बहुत प्रयास किया तो उसके बाद बीमारी के नाम पर बहुत गलत प्लानिंग क तहत लॉक डाउन कर दी। आज जिसका परिणाम फिर से करोड़ोंं-अरबो लोगों को दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया है। पुनः वहीं गरीबों, मजदूरों को रोजगार विहिन कर दिया है।

आज जिस परिस्थिति में भारत खड़ा हैं उस परिस्थिति को संभालने के लिए एक उच्चस्तरीय सोच़, समझ की आवश्यकता है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व क्षमता को देखकर यही लग रहा है कि अपनी बाल अवस्था की संक्रमित सोच़ में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर सुकून महसूस कर रहे हैं। कोरोना वायरस को लेकर जहां पुरा विश्व परेशानी में हैं तो वहीं भारत सरकार का नेतृत्व भारत की संस्कृति के अनुसार नहीं लग रही है। अपनी सारी राजनीतिक कमियों और नेतृत्व की कमियों को छुपाने के लिए आम लोगों को विभिन्न प्रकार से तबाह किया जा रहा है। आज एक तैयारी की जरूरत को पूरा करने की जगह विभिन्न प्रकार के राजनीतिक हथकंडा अपनाया जा रहा है। लाॅक डाउन में 130 करोड़ भारतीयों तक भोजन-पानी-स्वास्थ्य नहीं पहुंच पाए तो विभिन्न हथकंडे अपनाकर लोगों पर अंग्रेजियत रूपी पुलिस की कुरूरता से डंडे-लाठियों से कुटवा रहे हैं।

आम आदमी जो बड़े उम्मीदों से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में दुबारा बैठाया, लेकिन आज गरीबों-मजदूरों की मौत से खेल रहे हैं। भोजन-पानी के साथ चिकित्सा के लिए दर-दर भटकने भारत वासियों के लिए कोई मार्ग भारत सरकार के पास नज़र नहीं आती है। भोजन-पानी के लिए भटकने वाले भारतीय जनता को एक व्यवस्थित व्यवस्था को लेकर आंखें कोई तैयारी नहीं की गई अब तक। राजनीति खेलों कीमत आज भारतीय आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। तो वहीं देखा जाए तो राजनीतिक खेल का सबसे बड़ा शिकार बिहार और बिहारी हो रहे हैं। जिस तरीके से बिहारियों ने भारत का निर्माण किया और भारत के कण-कण जाकर एक सामाजिक संस्था के रूप में काम किया। भारत निर्माण में सहयोग ने आज आजादी के बाद एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में निर्मित किया।

वोट बैंक की राजनीति खेलकर बिहारियों की राष्ट्र वाद के साथ बखुबी खेला जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही बिहार को एक राजनीतिक अखाड़े का केन्द्र बिंदु बनाये जाने लगा है। जहां राज्यों की सरकारों ने पूरे देश में बिहारियों का मानसिक क्षति पहुंचाई है वह बहुत ही घातक है। भारत माता के सच्चे सपूत ने भारत के निर्माण के लिए हमेशा तत्पर रहकर सेवा दिया है। बिहारी एक गाली के तौर पर बना दिया गया था, जिसे एक स्वाभिमान के रूप में स्थापित कर दिया। आज वहीं बिहारियों की ईमानदारी का प्रमाण है कि आज हजारों किलोमीटर दूर से अपने घर लौट रहे हैं और पुनः भारत की संस्कृति को आगे बढ़ाने पूरे भारत में फ़ैल जाएंगे। आज पुनः जन-धन खातों में चंद रूपयों में लोगों को गुमराह कर लंबी-लंबी लाइनें दोहरा दी। पुनः नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया और सबों को लाईन में लगकर, पुलिस को लाठी चलाने का अनैतिक आदेश दे दिए। हर पंचायत स्तरों पर भोजन-पानी की एक सुव्यवस्थित व्यवस्था हो सकती थी। हर पंचायत स्वास्थ्य सेवा का उपयोग कर सकते थे लेकिन भारत सरकार के नेतृत्व नरेंद्र मोदी के हाथों में बिहारियों के लिए शुभ संकेत नहीं दे पाई। नरेंद्र मोदी का भारत के प्रधानमंत्री के रूप में यह एक बहुत ही संकटदायी स्थिति बनाकर रखा गया है। बिहारियों की हृदयाघात और उसके राष्ट्र वाद पर किया गया कुटाघात बिहार सरकार जो नीतीश कुमार के रूप में हैं उनके लिए भी राजनीतिक रूप से घातक है। यह समय है कि बिहार सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में अपनी पुरी ताकत लगाते हुए बिहारियों का गौरव बढ़ाऐ।

15-Apr-2020 10:56

भारत_दर्शन मुख्य खबरें

समाचार भारत_दर्शन राजनीति खेल जुर्म शिक्षा चिकित्सा धर्म परम्परा व्यक्तित्व कला सम्मान फिल्म सामाजिक_संस्थान रोजगार कानून अर्थव्यवस्था समस्या पर्यावरण सैनिक पुलिस गांव शहर ज्योतिष सामान्य_प्रशासन जन_संपर्क छात्र_छात्रा
Copy Right 2020-2025 Ahaan News Pvt. Ltd. || Presented By : CodeLover Technology