17-Apr-2020 12:33

1990 से बिहार के विकास में बाधक रहीं भाजपा, विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ लगातार सत्ताभोगी

15-15 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार का अब राजनीतिक अंत

सहयोगी रामविलास पासवान, सुशील मोदी, उपेन्द्र कुशवाहा, पप्पू यादव, शरद यादव ने संयुक्त रूप से लूट मचाई। भारतीय राजनीति में आजाद भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक परिवर्तन जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से पैदा हुआ। जिस राजनीतिक सोच़ को बदलने के लिए जय प्रकाश नारायण ने आंदोलन किया, वह राजनीतिक सोच़ और अपने स्तरों से गिरकर कलंक का टीका लगा गई। एक ऐसा कलंक जो शायद एक दिन भारतीय संस्कृति और संस्कारों की बलि चढ़ा दी जाएगी। भारतीय राजनीति में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की झलक मिलती हैं वह वास्तव में वैशाली गणतंत्र से कोसों दूर नज़र आ रही हैं। वैशाली के लोकतांत्रिक व्यवस्था को दुरूस्त करने में राजनेताओं की सोच़ अंग्रेजी हुकूमत जैसी ही नज़र आती रही हैं।

लालु परिवार 15 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे, वह परिवार 15 सालों में एक ऐसे काम बिहार के लिए बताने का कष्ट करें, जिससे बिहारियों को बिहार में रोजगार मिला हो। लालू प्रसाद यादव ने बिहार में जातिवादी राजनीति का ऐसा बीज बोया कि रोजगार और भोजन की जगह जाति ही सब कुछ बना दिया गया। अपने पहले शासन की शुरुआत ही लालू प्रसाद यादव ने भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) के साथ मिलकर किया। लेकिन लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान की जातिवादी राजनीति थी और भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) को आगे बढ़ना था, तो कुछ समय के बाद अगले चुनाव आते आते अलग धारा बना दिया गया। उसके अनुसार लंबी तैयारी के साथ विकास पुरुष नीतीश कुमार का 15 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। यह अगले सरकार की बदलाव में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) ने सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई है। जिसका परिणाम है कि आज तक लगातार बिहार की बर्बादी में भूमिका निभाई है।

आज पिछले 30 सालों की राजनीति ने बिहार का कितना बढ़िया निर्माण भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) ने किया वह आज पुरे भारत में दिख रहा है। आज तक 30 सालों की राजनीतिक सफ़र में 30 ऐसे काम बता नहीं पाएंगे कि जो बिहार में रोजगार के लिये गए। वहीं लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर जातिवादी व्यवस्था बढ़ाने में मददगार रहे हैं। आज बिहार में बिहारियों के लिए क्या तैयार किए वह बताने का कष्ट करें। जिससे बिहारियों को बिहार में रोजगार मिला हो। आज कोरोना वायरस से दिल्ली भूख और प्यास से करहाते बिहारियों की कहानी बन कर रह गई है। आज दिल्ली मुख्यमंत्री कहते हुए नहीं थकते है कि प्रवासी मजदूरों के रहने खाने का सारा खर्च और व्यवस्था दिल्ली सरकार उठा रही है। जबकि खुली आंखों से देखने के पश्चात ऐसा प्रतीत होता है, कि रोड पर चलते भूखे जानवरो सी हालत हो गई है बिहारियों की।

पिछले 30 सालों में बड़े भाई - छोटे भाई व दोनों के मजबूत सहयोगियों की भूमिका में आज के सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) रहीं हैं। और अब इसका गुनहगार कौन है ? वहीं ख़ास 15 साल से कुर्सी से न उतरने वाले नीतीश कुमार और सुशील मोदी, जिसने बिहार से पलायन रोकने में असफल रहे। वहीं दिल्ली का धूर्त और निहायती घटिया मसिकता को प्रदर्शित करता भारत सरकार जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हैं, जो चुनाव पूर्व शाहीन बाग़ के भरोसे राजनीतिक खेल में देश की हालत को गंभीर कर दिया। शाहिनबाग को मजबूत गृहमंत्री अमित शाह ने राजनीतिक खेल के लिए पिंच बनाकर रहने दिया। वहीं बिहार के वो सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों एवं सदनों में बैठकर बिहारियों के वोट की राजनीति के साथ खेले। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि खुद वो मजबुर, मजदूर बिहारी, जो मोदी जी के चिकने, चुपरी बातों से प्रभावित हो कर 38 की 38 सीटों पर भाजपा को जीत का माला पहना कर खुद को राष्ट्रवादी होने का प्रमाण दिया। नरेंद्र मोदी के एक भारत, सर्वश्रेष्ठ भारत के सपने को सकार करने हेतु अपना योगदान दिया। जल्द ही इस करोना रूपी महामारी के बाद आ रहा है बिहार विधानसभा चुनाव में बिहारियों की तस्वीर बदलने की तैयारी करनी होगी। इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने आपके पास अपने घरों में रहे, इस महामारी से बचे। और याद रखें बिहार की जनता करें पुकार, नहीं चाहिए बेरोजगार बनाने वाला सरकार।

17-Apr-2020 12:33

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