12-Oct-2019 10:24

वैशाली के स्थापना दिवस पर हत्या और शाम अभी बाकी है

आज वैशाली 48 वा स्थापना दिवस एवं 47 वर्षों का सुंदर सफर हत्याकांड उसे सुशोभित होती हुई

वैशाली जिला आज ही के दिन 12 अक्टूबर 1972 को मुजफ्फरपुर जिले से अलग हुआ था। 1972 से पहले वर्तमान वैशाली जिला हाजीपुर अनुमंडल के नाम से जाना जाता था। लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है, अंग्रेजी शासनकाल में हाजीपुर के एसडीओ के रूप में जगदीश चंद्र माथुर वैशाली को पूरे विश्व पटल पर स्थापित किया। जिसके बाद वैशाली एवं वैशाली गणराज्य क्षेत्र के लोगों को यह पता चला कि हम कितने गौरवपूर्ण इतिहास के धरोहर है। आज जिस इतिहास को लेकर हम इतना ज्यादा गौरवान्वित फील करते हैं। महसूस करते हैं, उतनी ही स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। आज वैशाली दुनिया के पटल पर अपराधिक वैशाली के रूप में नजर आ रही है। एक ऐसा जिला जिसने मानवता और माननीय धर्म को अपना कर्तव्य समझकर एक साथ ले कर लोगों को चलने का काम किया। वही आज लोकतंत्र के हत्यारों के रूप में राजनीतिक दलों ने ना तो धर्म समझा और ना कर्तव्य बोध हैं। उन्हें और जिसका परिणाम है कि आज पूरा वैशाली हत्या के साए में जी रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में देखा जाए तो सुरेश चौधरी के पुलिस अधीक्षक के रूप में आने के साथ ही वैशाली में अपराध की स्थिति लगातार बढ़ती चली गई। फिर हाजीपुर के राजनीतिक दलों की स्थिति बोलने लायक, जिसके कारण बाद में राकेश कुमार के आने के बाद हत्या का एक बड़ा सा दौर चल पड़ा। राकेश कुमार का भी विरोध शुरू हुआ। लेकिन राकेश कुमार के जाते, मानवजीत सिंह ढिल्लों जैसे ऐसे पुलिस अधीक्षक को लाकर वैशाली को पूर्णरूपेण अभिशाप अर्थ कर दिया। मानव सिंह ढिल्लों एक ऐसे पुलिस अधीक्षक के रूप में सदा याद किए जाएंगे। जिनके कार्यकाल में लगातार हत्या होती रही। पुलिस अधीक्षक चुपचाप आंख बंद कर अपराधियों को प्रश्रय देते रहे। प्रश्रय देने का मतलब यह है कि उन्होंने ऐसा कोई प्रयास ही नहीं किया। जिससे अपराधी भयभीत होता, आज वैशाली जिला की स्थिति इतनी बुरी हो चुकी है कि प्रतिदिन फिर से हत्याओं का दौर शुरू हो गया है। और पुलिस अधीक्षक के रूप में आय जगुन्नाथ रेड्डी एक मूकदर्शक की भूमिका में नजर आते हैं।

वैशाली में खुले हत्याओं की दुकान अब वैशाली पुलिस के बस की बात नहीं कि वह बंद करा दे। लगभग 2 महीने होने को है और अब तक पुलिस अधीक्षक के रूप में रेडी जी को समझ में नहीं आ रहा की करे। तो क्या करें वैशाली पुलिस की टीम का नेतृत्व एक ऐसे पुलिस अधीक्षक को दिया गया है। जो अपनी टीम पर कमान कसने में पुर्णरूपेन नाकामयाब है। वैशाली जिले में जितने भी थाने पड़ते हैं । उसके थानाध्यक्षों के पास शराब, गांजा, बालू एवं अवैध वसूली के लिए दो पहिया वाहन चालकों से चालान के नाम पर पैसा वसूलने के अलावा कोई काम नहीं है और इसी पैसे वसूली के चक्कर में लगातार वैशाली जिले में हत्या हो रही है । बहुत सारे मामलों में कहा जाता है पैसा वसूली का कारण है । सरकार के ऊपर से दबाव होता है । उन्हें पैसा देने का इसकी जांच होनी चाहिए कि कोई भी थाना प्रभारी बनता है । तो क्या वाकई में थानाध्यक्षों पर यह दबाव होता है कि उन्हें अपने थाना क्षेत्र से अवैध वसूली कर सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है । या सरकार को बदनाम करने का एक अवैध तरीका है । जिससे अवैध वसूली भी होता है और कोई मुंह खोले ना ।

वैशाली जिला पुलिस अधीक्षक रेडी रेडी अगर वाकई में वैशाली जिला में अपनी पदस्थापना को उचित ठहराना चाहते हैं । तो कार्रवाई करना शुरू करें और करवाई करते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह अवैध हथियार को पूर्णरूपेण वैशाली जिला में बंद करें । सरकार के आदेश अनुसार शराबबंदी को लागू कराने के लिए शराब माफियाओं की जगह पर शराब की कंपनियों पर सीधी कार्रवाई हो और उनके मालिकों की गिरफ्तारी होकर हाजीपुर के जेल में रखा जाए । अगर वैशाली पुलिस अधीक्षक रेडी जी को हिम्मत है और वाकई ईमानदारी से उन्हें काम करना है । तो शराब की कंपनियों के मालिकों को जेलों में बंद करें । वही अवैध रूप से वसूली के जितने धंधे हैं । उन्हें त्वरित रूप से बंद करने का रास्ता निकालें । अगर वैशाली पुलिस अधीक्षक रेडी जी को यह समझ नहीं आता है कि उन्हें कैसे काम करना चाहिए । तो उन्हें एक सार्वजनिक बैठक करनी चाहिए । वैसे युवाओं के साथ जो एक दृढ़ संकल्पित है । अपने परिवार वैशाली एवं राष्ट्र के प्रति लेकिन इसमें वैसे लोगों से बचाव होनी चाहिए की फेसबुक हीरो को जो पुलिस की चाटुकारिता और दलाली करने में व्यस्त होते हैं । उन से बचें पुलिस आज दलाल और चाटुकारओं के बीच इतनी मशगूल हैं कि लगभग पुलिस की टीम के आसपास आप दलालों, चाटुकारों को ही देख सकते हैं। अपराध को बढ़ाने में वैशाली पुलिस की भूमिका चटकारो के साथ बैठने से बड़ी है और वैशाली पुलिस को अगर अपनी छवि सुधार नहीं है । तो चाटुकार दलालों से दूर रहना होगा । चाहे वह किसी राजनीतिक दल का हो, किसी बड़े बड़े मीडिया हाउस का हो या किसी भी प्रकार की अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के दलाल । पुलिस को नहीं डरना होगा । उन सभी से जो उन्हें अपनी उंगली पर ना चाहते हैं और उनकी छवि को खराब कर आते हैं । इसलिए बहुत समय नहीं है । वैशाली पुलिस अधीक्षक जगुन्नाथ रेडी के पास इसलिए वह जल्द से जल्द ऐसी मुहिम चलाएं, जिससे वैशाली की प्रतिष्ठा बरकरार हो ।

12-Oct-2019 10:24

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