21-Sep-2019 11:09

अब पुलिस की बारी, अब अपनी अपनी बारी का इंतजार करें बिहार पुलिस

पुलिस ने संरक्षण देकर अपराध को बढ़ाया अब उन्हें हो रही परेशानी तो पुलिस का कर अंत।

इसे ही कहते हैं अच्छे दिन आ गए सकरा थाना क्षेत्र मार्कन की घटना मुज़फ़्फ़रपुर में बेखौफ अपराधियों ने ओपी में घुस कर हवलदार मलेस्वर राम को गोली मारा, इलाज के दौरान हुई मौत। उसके सिर में मारी गोली हैं, हवलदार को गोली मारने के साथ ही उसका करवाईन भी लूट लिया हैं। आनन-फानन में अन्य पुलिस कर्मियों ने अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां इलाज के दौरान वह अपना दम तोड़ दिया। दिनदहाड़े हुई घटना, अब किसकी गलती है। रामराज आ गया बिहार में और सभी स्वतंत्र हो चुके हैं। सत्ता के शासन का भय बिल्कुल समाप्त हो चुका है। डर केवल पुलिस के अधिकारी रहे हैं। कभी वरीय अधिकारी द्वारा निलंबन का डर तो कभी थाना क्षेत्रों में बड़े अपराध का डर। अपराधियों की तो मौज है, बिल्कुल राम राज की तरह बेफिक्र हो चुके हैं अपराधी। कभी दिन दहाड़े नगद लुटनेवाले अपराधियों ने आज एक हवलदार की हत्या कर कार्बाइन लूट लिया और आराम से चलते बने।

ज्ञात हो कि मुज़फ़्फ़रपुर के सकरा थाना के मारकन चौक पर 7 सिपाही एक हवलदार और एक ऑफिसर की तैनाती रहती है। इतने पुलिस कर्मियों के रहते अपराधियों ने कैसे दिनदहाड़े घटना को अंजाम दिया। दरअसल जहां यह घटना घटी वह जगह इन पुलिसकर्मियों के लिए दुधारू गाय की तरह है। वहां तैनात सभी पुलिसकर्मी प्रतिदिन ट्रक चालकों से उगाही में लगे रहते हैं। उगाही के चक्कर मे पुलिसवाले एक एक गाड़ी के ड्राइवर के पास जाकर मोल भाव करने लगते थे। यादी 20 गाड़ियां खड़ी हो गई तो आगे से पीछे तक सभी पैसा उगाही में लग जाते और एक दूसरे से काफी अलग हो जाते थे। अपराधियों ने पुलिस के इसी कमी की रेकी की और हथियार लूटकर चलते बने। वैशाली पुलिस अधीक्षक की तरह ही मुजफ्फरपुर की पुलिस टीम अपराध और अपराधियों का संरक्षक बनकर कदमताल करते रही हैं। अपराधियों को बहुत आसानी से हत्या, लूट की घटनाओं को अंजाम देने दिया जाता रहा है। उत्तर बिहार की बागडोर मुजफ्फरपुर ही संभालती रही है और यहां लगातार हत्याओं का दौड़ रहा है। पिछले कुछ महीनों में 100 सब से ज्यादा हत्या व लूट की घटनाओं के साथ साथ करोड़ों रुपए की लूट और गोलियों से लोगों को भूना गया है। डर के साए में जीने को मजबूर मुजफ्फरपुर में अब अपराधियों का एकमात्र राज है और बिहार पुलिस और जिला प्रशासन गहरी नींद में रही हैं।

यातायात नियमों में संशोधन से पुलिस विभाग में हर्ष का माहौल बना हुआ है जिसके कारण लगातार गाड़ियों की चेकिंग की जाती है। आम आदमी को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा है और वही अपराधियों को खुली छूट रही हैं कि वो हत्या, लूट, गोलीबारी कर सकें। परिणाम एक दिन आना था, जैसा आज सामने आया। पुलिस अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं होता हैं तो आज जैसे परिणाम आगे भी देखने को मिलेंगे। याद ही होगा बिहार पुलिस को कि पिछले महीने ही सारण जिले में कई पुलिस वालों की हत्या की गई थी। अपराधियों पर पुलिस लगाम लगाने में नाकामयाब रही और जोड़ आजमाईश में हत्या शुरू हो गई।

मुजफ्फरपुर की घटना को लेकर बिहार छात्र संघ के अध्यक्ष गौतम सिंह ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चुप्पी साधे रहती है और वोट मांगने के समय आते हैं। तब तो मैंने किया, मैंने वह किया, पर करता किया, उस समय बताना मैंने यह सब करवाया। मुजफ्फरपुर में पिछले कुछ समय में इतनी हत्या हो गई है कि अब पुलिस पर भरोसा करना मुश्किल है। याद ही होगा कि लगभग एक साल पहले ही मुजफ्फरपुर के प्रथम महापौर स्वर्गीय" समीर कुमार" की बेरहमी से हत्या हुई।

21-Sep-2019 11:09

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