02-Feb-2020 01:33

बीसीए अध्यक्ष द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितता का आरोप गलत : संजय कुमार

सी इ ओ बीसीसीआई के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अंतिम स्टेटस रिपोर्ट में वर्णित किया गया है, अतरू इस मामले में हम लोग सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिय।

पटना : बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी द्वारा मुझपर लगाए गए वित्तीय अनियमितता का आरोप सरासर गलत है। जिस तरह से उन्होंने मुझपर झूठा आरोप लगाया है वह मुझे एसोसिएशन से हटाने की बिल्कुल सोची - समझी साजिस है। उक्त बातें शनिवार को बीसीए सचिव संजय कुमार ने कंकरबाग स्थित होटल अल्काजार्स इन् में संवातदाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही। आई सी ए के सचिव हितेश मजुमदार और अध्यक्ष अशोक मल्होत्रा ने बीसीए को मेल करके पुछा है, कि आई सी ए के द्वारा बीसीए के कमेटी ऑफ मैनेजमेंट के लिए नामित सदस्य के शामिल हुए बगैर किसी भी एसोसिएशन का शीर्ष परिसद पूर्ण नहीं होता। सचिव ने संवाददाता सम्मलेन में बताया की यह मेल तथा कथित ए जी एम को अवैध घोषित करने के लिए पर्याप्त है। सचिव ने बताया की आई सी ए के प्रतिनिधि और बीसीए कमेटी ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य अमिकर दयाल और कविता राय को 31 जनवरी को होने वाले ए जी एम में भाग नहीं लेने दिया गया तथा दुर्व्यवहार किया गया। इस सबन्ध में विस्तार से जानकारी देते हुए बीसीए सचिव संजय कुमार ने बताया की इन दोनों खिलाडियों को ए जी एम में भाग नहीं लेने देने तथा उनके साथ हुए दुर्व्यवहार से आहत होकर मै, कोषाध्यक्ष और साथ जा रहे जिलों के सदस्यों के द्वारा ए जी एम् स्थल से वापस हो गया और ए जी एम को स्थगित करते हुए, ए जी एम् की नयी तिथि शीघ्र घोषित करने सम्बन्धी सूचना बीसीए के वेबसाईट पर प्रसारित कर दिया। सचिव ने बताया की मुझे मिडिया के माध्यम से पता चला है की मुझे छह करोड़ की वित्तीय अनियमितता का आरोपी बनाया गया है, जबकि जब से हमारी कमेटी आयी है तब से लगभग 3.66 करोड़ रूपये का खर्च बीसीसीआई के मैचों सहित द्वारा किया गया है। जहाँ तक वित्तीय अनियमितता सवाल है तो हमने इसके लिए बीसीसीआई को लिख रहा हूँ की अबतक के सारे खर्चों को अपने निबंधित अंकेक्षण एजेंसी से जांच करवा कर सही स्थिति को सामने लाये।

सचिव ने बताया की बीसीए अध्यक्ष के द्वारा मनमानी तरीके से जिलों को मान्यता देने के मामले में फैसले लिए जा रहे है, वो कहीं से भी बीसीए संविधान के अनुरूप नहीं है ओर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संपुष्ट किये गए संविधान की अवमानना है। अध्यक्ष ने पहले तो जिला विवाद में समझौता कराने के मामले को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करवाया, खुद अध्यक्ष बन गए ओर मनमानी तरीके से जिलों को अधिकार देने लगे। सचिव ने बताया की बीसीए अध्यक्ष के द्वारा मेरे ऊपर छह करोड़ के वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है, इस सम्बन्ध में कहना है की बीसीए के संविधान में जिला के मामले में बीसीए को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है , साथ हीं साथ जिन जो मामले लोकपाल के यहां लंबित है, उन मामलों में एसोसिएसन कोई भी करवाई नहीं कर सकती है, लेकिन 15 नवम्बर को बीसीए की हुई कमेटी ऑफ मैनेजमेंट की बैठक में माननीय अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने कहा की मैं समझौता के आधार पर, गैर विवादित तरीके से जिलों में क्रिकेट के सञ्चालन के लिए एक कमेटी बनाकर समाधान करना चाहता हूँ ,जिसके आलोक में अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिला प्रतिनिधि और एक अधिवक्ता (जिसकी नियुक्ति अध्यक्ष को हीं करने का अधिकार दिया गया)। उदेश्य था की जिलों के विवाद को हल कर बिहार क्रिकेट के विकाश के लिए कम किया जाय, ओर अध्यक्ष जी एक अभिवावक के रूप में जिलों में समझौता करवाकर गैर विवादित तरीके से क्रिकेट के सञ्चालन में सहयोग करेंगे, लेकिन परिणाम काफी विपरीत रहा, अध्यक्ष जी ने बगैर किसी भी पक्ष को सुने हुए एक अंतरिम आदेश जारी कर दिया, जिसका कोई आधार नहीं बनता है, फिर हमलोगों के मौखिक विरोध पर सुनवाई की, और जिलों के मामले में आदेश दिया, फिर जिला संघो के प्रतिनिधि सह त्री सदस्यीय कमेटी के सदस्य ने भी तीन जिलों के मामले में समझौता कराकर आदेश दिया।

अब यहाँ यह बताना है की अंतरिम आदेश से पूर्व जिला संघों के प्रतिनिधि को यह भी मालूम नहीं था की हमारी कमेटी का तीसरा अधिवक्ता सदस्य कौन है, यहाँ तक की जिला संघों के प्रतिनिधि ने स्वयं को इस कमेटी से अलग करते हुए इसे भंग करने का भी पत्र मुझे दिया, उन्होंने अपने ऊपर कई प्रकार से प्रतारित करने का भी आरोप अध्यक्ष पर लगाया , मगर मैं लगातार उन्हें समझाया और बिहार क्रिकेट के हित को देखते हुए उन्हें समझाता रहा, लेकिन अब पता चला की जिला संघों के प्रतिनिधि ओर सदस्य अधिवक्ता महोदय के द्वारा जारी आदेश में भी मनमानी की गयी। त्रिदस्सीय कमेटी को मजाक बना दिया गया, अंतरिम आदेश में जो 13 जिला का नाम था, वो है रू बेगुसराय, मधुबनी , भोजपुर, बक्सर, लखीसराय, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया , किशनगंज, पूर्वी चंपारण , पश्चिमी चंपारण , गया और वैशाली, जबकि जो अंतिम आदेश निकला उसमे से पूर्वी चंपारण का नाम हटा कर कटिहार को शामिल कर दिया गया, और अब पता चल रहा है की उसमे भी वैशाली के अंतिम आदेश को खारिज कर दिया गया है, तो यह मनमानी के अलावा ओर कुछ नहीं है. अब हमारे पास यही विकल्प बचता है की 13 अप्रैल के पूर्व के लोकपाल के आदेश के अलोक में 25 मई को हुए ए जी एम, जिसमे चुनाव की घोषणा की गयी थी, को आधार मानकर आगे की करवाई की जाय, भविष्य में इन जिलों के मामले में अगर कोई सक्षम न्यायालय के आदेश या निर्देश प्राप्त होता है, तो उसे मान्य किया जायेगा. क्योकि लोकपाल के आदेश की अवेहलना नहीं की जा सकती है।

मेरे ऊपर कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला उठाया जा रहा है, इस सम्बन्ध में स्पष्ट कर दूं की इस मामले को सी इ ओ बीसीसीआई के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अंतिम स्टेटस रिपोर्ट में वर्णित किया गया है, अतरू इस मामले में हम लोग सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिय। सचिव ने अंत में कहा की आई सी ए के मेल के अनुसार और बगैर पूर्ण शीर्ष परिसद की उपस्थिति के कोई भी कॉम या ए जी एम की बैठक मान्य नहीं होती है। इस संवाददाता सम्मलेन में वैशाली जिला के अध्यक्ष मनोज शुक्ला, पूर्णिया के सचिव हरिओम झा, सुपौल के सचिव शशिभूषन सिंह , कटिहार के सचिव रितेश कुमार सहित कई जिलों के सचिव उपस्थित रहे.

02-Feb-2020 01:33

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